Stotram - Sacred Scripture

Sri Ramashtakam (Rama Ashtakam)

Sri Ramashtakam (Rama Ashtakam)

Stotram
Rama
9 Verses
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श्री रामाष्टकं (राम अष्टकं)

श्लोक 1

भजे विशेषसुन्दरं समस्तपापखण्डनम् ।

स्वभक्तचित्तरञ्जनं सदैव राममद्वयम्

श्लोक 2

जटाकलापशोभितं समस्तपापनाशकम् ।

स्वभक्तभीतिभञ्जनं भजे ह राममद्वयम्

॥ 1 ॥

श्लोक 3

निजस्वरूपबोधकं कृपाकरं भवाऽपहम् ।

समं शिवं निरञ्जनं भजे ह राममद्वयम्

॥ 2 ॥

श्लोक 4

सदा प्रपञ्चकल्पितं ह्यनामरूपवास्तवम् ।

निराकृतिं निरामयं भजे ह राममद्वयम्

॥ 3 ॥

श्लोक 5

निष्प्रपञ्च निर्विकल्प निर्मलं निरामयम् ।

चिदेकरूपसन्ततं भजे ह राममद्वयम्

॥ 4 ॥

श्लोक 6

भवाब्धिपोतरूपकं ह्यशेषदेहकल्पितम् ।

गुणाकरं कृपाकरं भजे ह राममद्वयम्

॥ 5 ॥

श्लोक 7

महासुवाक्यबोधकैर्विराजमानवाक्पदैः ।

परं च ब्रह्म व्यापकं भजे ह राममद्वयम्

॥ 6 ॥

श्लोक 8

शिवप्रदं सुखप्रदं भवच्छिदं भ्रमापहम् ।

विराजमानदैशिकं भजे ह राममद्वयम्

॥ 7 ॥

श्लोक 9

रामाष्टकं पठति यः सुखदं सुपुण्यं

व्यासेन भाषितमिदं शृणुते मनुष्यः ।

विद्यां श्रियं विपुलसौख्यमनन्तकीर्तिं

सम्प्राप्य देहविलये लभते च मोक्षम्

॥ 8 ॥

श्लोक 10

इति श्रीव्यास प्रोक्त श्रीरामाष्टकम् ।