Stotram - Sacred Scripture

Pahi Ramaprabho

Pahi Ramaprabho

Stotram
Rama
122 Verses
110%

पाहि रामप्रभो

श्लोक 1

रागम्: मध्यमावति

तालम्: झम्प

पाहिरामप्रभो पाहिरामप्रभो

पाहिभद्राद्रि वैदेहिरामप्रभो ॥ पाहिरामप्रभो ॥

श्रीमन्महागुणस्तोमाभिराम मी

नामकीर्तनलु वर्णिन्तु रामप्रभो

श्लोक 2

॥ 1 ॥ पाहिरामप्रभो ॥

सुन्दराकार हृन्मन्दिरोद्धार सी

तेन्दिरा संयुतानन्द रामप्रभो

श्लोक 3

॥ 2 ॥ पाहिरामप्रभो ॥

इन्दिरा हृदयारविन्दादिरूढ

सुन्दाराकार आनन्द रामप्रभो

श्लोक 4

॥ 3 ॥ पाहिरामप्रभो ॥

ऎन्दुनेजूड मीसुन्दराननमु

कन्दुनो कन्नुलिम्पॊन्द रामप्रभो

श्लोक 5

॥ 4 ॥ पाहिरामप्रभो ॥

पुण्यचारित्रलावण्य कारुण्य गां

भीर्य दाक्षिण्य श्रीरामचन्द्रप्रभो

श्लोक 6

॥ 5 ॥ पाहिरामप्रभो ॥

कन्दर्पजनक नायन्दु रञ्जिल सदा

नन्दुडवै पूजलन्दु रामप्रभो

श्लोक 7

॥ 6 ॥ पाहिरामप्रभो ॥

इम्पुगा जॆवुलकु न्विन्दुगा नीकथल्‌

कन्दुगा मिम्मु सॊम्पॊन्द रामप्रभो

श्लोक 8

॥ 7 ॥ पाहिरामप्रभो ॥

वन्दनमुचेसि मुनुलन्दरु घनुलैरि

विन्दवैनट्टि गोविन्द रामप्रभो

श्लोक 9

॥ 8 ॥ पाहिरामप्रभो ॥

बृन्दारकादि सद्बृन्दार्चितावतार

विन्द मुनि सन्दर्शितानन्द रामप्रभो

श्लोक 10

॥ 9 ॥ पाहिरामप्रभो ॥

तल्लिविनीवॆ मातण्ड्रिविनीवॆ मा

धातवुनीवॆ माभ्रात रामप्रभो

श्लोक 11

॥ 10 ॥ पाहिरामप्रभो ॥

पल्लवाधरलैन गॊल्लभामलगूडि

युल्लमलरङ्ग रञ्जिल्लु रामप्रभो

श्लोक 12

॥ 11 ॥ पाहिरामप्रभो ॥

मल्लरङ्गम्बुनन्दॆल्ल मल्लुलजीरि

यल्ल कंसुनि जम्पु मल्ल रामप्रभो

श्लोक 13

॥ 12 ॥ पाहिरामप्रभो ॥

कॊल्ललुग नीमाय वॆल्लिविरियग जेय

सल्लापमुन क्रीडसल्पु रामप्रभो

श्लोक 14

॥ 13 ॥ पाहिरामप्रभो ॥

तम्मुडुनु नीवु पार्श्वम्मुलञ्जेरि वि

ल्लम्मुलॆक्कॆडि निल्चुटिम्मु रामप्रभो

श्लोक 15

॥ 14 ॥ पाहिरामप्रभो ॥

क्रम्मुकॊनिशात्रवुलु हुम्मनुचुवच्चॆदरु

इम्मैनबाणमुलिम्मु रामप्रभो

श्लोक 16

॥ 15 ॥ पाहिरामप्रभो ॥

रम्मु नाकभयम्मु निम्मु नीपादमुल्‌

नम्मिनानय्य श्रीरामचन्द्रप्रभो

श्लोक 17

॥ 16 ॥ पाहिरामप्रभो ॥

कण्टि मी शङ्खम्मु कण्टि मी चक्रमु

कण्टि मी पादमुल्गण्टि रामप्रभो

श्लोक 18

॥ 17 ॥ पाहिरामप्रभो ॥

विण्टि महिम वॆन्नण्टि तम्मुडु नीवु

जण्टरावय्य नावॆण्ट रामप्रभो

श्लोक 19

॥ 18 ॥ पाहिरामप्रभो ॥

मेमु नीवारमैनामु रक्षिम्पुम

न्नामु जागेल श्रीरामचन्द्रप्रभो

श्लोक 20

॥ 19 ॥ पाहिरामप्रभो ॥

नामनोवीधिनि प्रेमतोनुण्डु मी

भूमिजासहित जय रामचन्द्रप्रभो

श्लोक 21

॥ 20 ॥ पाहिरामप्रभो ॥

मी महत्त्वम्मु विन मनमन्दु प्रेम

वेमरुन्‌ बुट्टु श्रीरामचन्द्रप्रभो

श्लोक 22

॥ 21 ॥ पाहिरामप्रभो ॥

श्यामसुन्दर कोमलं जानकीमनः

कामुकं त्वं भजे रामचन्द्रप्रभो

श्लोक 23

॥ 22 ॥ पाहिरामप्रभो ॥

कामितार्थमुलिच्चु नी महत्वमु विन्न

ना मॊरालिञ्चु नास्वामि रामप्रभो

श्लोक 24

॥ 23 ॥ पाहिरामप्रभो ॥

कामितप्रभुडवै प्रेमतो रक्षिञ्चु

स्वामि साकेतपुरि रामचन्द्रप्रभो

श्लोक 25

॥ 24 ॥ पाहिरामप्रभो ॥

अन्न रावन्न नीकन्न नामीद नॆन

रुन्न वारेरि नायन्न रामप्रभो

श्लोक 26

॥ 25 ॥ पाहिरामप्रभो ॥

निन्नॆगाकनु मरे यन्युलगानन्‌

गन्नतण्ड्रिविग मायन्न रामप्रभो

श्लोक 27

॥ 26 ॥ पाहिरामप्रभो ॥

वॆन्नदॊङ्गिलि तिन्न चिन्नकृष्णम्म नि

न्नॆन्नगा वशमॆ रावन्न रामप्रभो

श्लोक 28

॥ 27 ॥ पाहिरामप्रभो ॥

ऎन्नॆन्नो जन्ममुल नॆत्तजालनु इक

निन्नॆ नॆम्मदिनि वर्णिन्तु रामप्रभो

श्लोक 29

॥ 28 ॥ पाहिरामप्रभो ॥

ऎन्निविधमुलनैन निन्नॆ नम्मिन वानि

मन्निञ्चि दयचेयुमन्न रामप्रभो

श्लोक 30

॥ 29 ॥ पाहिरामप्रभो ॥

पन्नगाधिपशायि भावनातीत आ

पन्न नामनवि विनवन्न रामप्रभो

श्लोक 31

॥ 30 ॥ पाहिरामप्रभो ॥

मेटिवाक्यम्बु मीसाटिदैवम्बु मु

म्माटिकिनि भुविलेदु मेटि रामप्रभो

श्लोक 32

॥ 31 ॥ पाहिरामप्रभो ॥

पाडुदुनु मिम्मु गॊनियाडुदुनु मोदमुन

वेडुचुन्नानु गापाडु रामप्रभो

श्लोक 33

॥ 32 ॥ पाहिरामप्रभो ॥

वेडुकोगानॆ नीजोडुकाडुनु नीवु

कूडि रारय्य नातोड रामप्रभो

श्लोक 34

॥ 33 ॥ पाहिरामप्रभो ॥

नेडु नाकोर्कॆ लीडेरगाजेसि का

पाडरा करिनेलु जाड रामप्रभो

श्लोक 35

॥ 34 ॥ पाहिरामप्रभो ॥

मूडुमूर्तुल कात्ममूलमै चॆन्नॊन्दु

वाडवनि श्रुतुलु निन्नाडु रामप्रभो

श्लोक 36

॥ 35 ॥ पाहिरामप्रभो ॥

चूडु मीभक्तुलनु गूडु मीरिपुल गो

राडु मीवल्ल गोविन्द रामप्रभो

श्लोक 37

॥ 36 ॥ पाहिरामप्रभो ॥

पुण्डरीकाक्ष मार्ताण्डवंशोद्भवा

खण्डलस्तुत्य कोदण्ड रामप्रभो

श्लोक 38

॥ 37 ॥ पाहिरामप्रभो ॥

कुण्डलिशयन भूमण्डलोद्धरण पा

षण्डजनहरण कोदण्डरामप्रभो

श्लोक 39

॥ 38 ॥ पाहिरामप्रभो ॥

निण्डुदयतोड नायण्ड बायकनु नी

वुण्डि गापाडु कोदण्डरामप्रभो

श्लोक 40

॥ 39 ॥ पाहिरामप्रभो ॥

जातकौतूहलं चक्षुकृत्यारमां

पूतसीतापते दात रामप्रभो

श्लोक 41

॥ 40 ॥ पाहिरामप्रभो ॥

पातकुललो मॊदटि पातकुड नावण्टि

पातकुनि कावुटे ख्याति रामप्रभो

श्लोक 42

॥ 41 ॥ पाहिरामप्रभो ॥

भूतनाथुनि विल्लु ख्यातिगा खण्डिञ्चि

सीतगैकॊन्न विख्यात रामप्रभो

श्लोक 43

॥ 42 ॥ पाहिरामप्रभो ॥

पूतनाकल्मषोद्धूत पॆ\न्‌शत्रु सं

हारि श्रीसीतासमेत रामप्रभो

श्लोक 44

॥ 43 ॥ पाहिरामप्रभो ॥

जातिनीतुलुलेक भूतलम्बुन दिरुगु

घातकुल बरिमार्चु नेत रामप्रभो

श्लोक 45

॥ 44 ॥ पाहिरामप्रभो ॥

ऎप्पुडुनु गण्टिकि रॆप्पवलॆ गाचि न

न्नॊप्पुगागावु मायप्प रामप्रभो

श्लोक 46

॥ 45 ॥ पाहिरामप्रभो ॥

एदया नीदया योदयाम्भोनिधी

यादिलेदय्य नामीद रामप्रभो

श्लोक 47

॥ 46 ॥ पाहिरामप्रभो ॥

घोरराक्षस गर्वहार विश्वम्भरो

द्धार गुणसान्द्रविस्तार रामप्रभो

श्लोक 48

॥ 47 ॥ पाहिरामप्रभो ॥

मोदमुन नीवु नन्नादुकोवय्य गो

दावरी तीर भद्राद्रि रामप्रभो

श्लोक 49

॥ 48 ॥ पाहिरामप्रभो ॥

नीदु बाणम्बुलनु नादुशत्रुलबट्टि

बाधिम्पकुन्नावदेमि रामप्रभो

श्लोक 50

॥ 49 ॥ पाहिरामप्रभो ॥

आदिमध्यान्त बहिरान्तरात्मुडवनुचु

वादिन्तुने जगन्नाथ रामप्रभो

श्लोक 51

॥ 50 ॥ पाहिरामप्रभो ॥

चालदेमि पदाब्जमुलसाटि यीपदु

नाल्गुलोकम्बुल गूडि रामप्रभो

श्लोक 52

॥ 51 ॥ पाहिरामप्रभो ॥

एल यीलागु जागेल जेसॆदवु म

म्मेलुकोवय्य मापालि रामप्रभो

श्लोक 53

॥ 52 ॥ पाहिरामप्रभो ॥

पालुवॆन्नलु म्रुच्चिलिन्तिवनि यशोद

रोटगट्टिन मायचालु रामप्रभो

श्लोक 54

॥ 53 ॥ पाहिरामप्रभो ॥

कॊल्ललुग व्रेपल्लॆ पल्लवाधरुलतो

नल्लबिल्लिगनु रञ्जिल्ल रामप्रभो

श्लोक 55

॥ 54 ॥ पाहिरामप्रभो ॥

वालि नॊक्कम्मुनन्‌ गूलवेसिन शौर्य

शालियौ निनुदलतु जाल रामप्रभो

श्लोक 56

॥ 55 ॥ पाहिरामप्रभो ॥

सालभञ्जिकल निर्मूलम्बु चेयगा

जालितिवि गोपालबाल रामप्रभो

श्लोक 57

॥ 56 ॥ पाहिरामप्रभो ॥

तालवृक्षमु लॊक्ककोल धरगूलगा

लीलनेसिन बाहुशालि रामप्रभो

श्लोक 58

॥ 57 ॥ पाहिरामप्रभो ॥

(शिलयैन यहल्य श्रीपादमुलु

सोक नॆलतयै मिमु मदितलचॆ

श्लोक 59

॥ 58 ॥ पाहिरामप्रभो ॥)

विनवय्य मनवि गैकॊनवय्य तप्पुलन्‌

गनकय्य सम्मतिन्गॊनुचु रामप्रभो

श्लोक 60

॥ 59 ॥ पाहिरामप्रभो ॥

दानधर्मम्बुलुन्‌ दपजपम्बुलु नीदु

नामकीर्तनकु सरिरावु रामप्रभो

श्लोक 61

॥ 60 ॥ पाहिरामप्रभो ॥

मानावमानमुलु महिनि नीवै युण्ड

माकेल मदिनि ईचिन्त रामप्रभो

श्लोक 62

॥ 61 ॥ पाहिरामप्रभो ॥

ज्ञानयोगाभ्यासमन्दु नुण्डॆडिवारि

कानन्दमयुडवैनावु रामप्रभो

श्लोक 63

॥ 62 ॥ पाहिरामप्रभो ॥

भानुवंशमुनन्दु मानवाधिपुडवै

दानवुल बरिमार्चिनावु रामप्रभो

श्लोक 64

॥ 63 ॥ पाहिरामप्रभो ॥

अणुरेणु परिपूर्णुडौ हृदयवास ना

मनवि विनु देवकीतनय रामप्रभो

श्लोक 65

॥ 64 ॥ पाहिरामप्रभो ॥

मान्यमै आश्रितवदान्यमै सुजन स

न्मान्यमै वॆलुगु मूर्धन्य रामप्रभो

श्लोक 66

॥ 65 ॥ पाहिरामप्रभो ॥

नित्यमै सत्यमै निर्मलम्बै महिनि

दिव्यवंशोत्तंसमैन रामप्रभो

श्लोक 67

॥ 66 ॥ पाहिरामप्रभो ॥

सेव्यमै मीपदद्भाव्यमै सज्जन

श्राव्यमै युण्डुनो दिव्य रामप्रभो

श्लोक 68

॥ 67 ॥ पाहिरामप्रभो ॥

गट्टिगा नीवुन\न्‌ पट्टुगा विहितमौ

नट्टुगा मम्मु चेपट्टु रामप्रभो

श्लोक 69

॥ 68 ॥ पाहिरामप्रभो ॥

दिट्टयगु ताटकिनिगॊट्टि वेगमॆ गाधि

पट्टि यागमु गाचिनट्टि रामप्रभो

श्लोक 70

॥ 69 ॥ पाहिरामप्रभो ॥

चुट्टुकॊनि कालिङ्गु डट्टहासमुचेय

पट्टुकॊनि तलनॆक्किनट्टि रामप्रभो

श्लोक 71

॥ 70 ॥ पाहिरामप्रभो ॥

सन्ततमु नन्नु रक्षिन्तुवनि नम्मि मि

म्मॆन्तुरा जानकीकान्त रामप्रभो

श्लोक 72

॥ 71 ॥ पाहिरामप्रभो ॥

पन्तमुन मी पादचिन्तनमु चेय ना

वन्तलन्नियु मानुटॆन्त रामप्रभो

श्लोक 73

॥ 72 ॥ पाहिरामप्रभो ॥

विन्तगादय्य नेनिन्तनाडिनदि ना

पन्तमुन मिम्मु भाविन्तु रामप्रभो

श्लोक 74

॥ 73 ॥ पाहिरामप्रभो ॥

शान्तमूर्तिनि रमाकान्तुडवनि चाल

सन्तसम्बुन निन्नु नॆन्तु रामप्रभो

श्लोक 75

॥ 74 ॥ पाहिरामप्रभो ॥

अक्षयम्बैन नीकुक्षिलो लोकमुल

रक्षिञ्चितिवि लक्ष्मीवक्ष रामप्रभो

श्लोक 76

॥ 75 ॥ पाहिरामप्रभो ॥

दन्तिवत्सल भक्तचिन्तामणी विश्व

मन्तयुनु नीवु रक्षिञ्चु रामप्रभो

श्लोक 77

॥ 76 ॥ पाहिरामप्रभो ॥

पक्षिवाहन शत्रुनिक्षेपणा नन्नु

रक्षिञ्चु मोक्षप्रदात रामप्रभो

श्लोक 78

॥ 77 ॥ पाहिरामप्रभो ॥

रक्षिञ्चि सज्जनुल वीक्षिञ्चि दुर्जनुल

राक्षसुल शिक्षिञ्चिनावु रामप्रभो

श्लोक 79

॥ 78 ॥ पाहिरामप्रभो ॥

रक्षकुडवै जगद्रक्षणमुचेयगा

राक्षसुल शिक्षिञ्चिनावु रामप्रभो

श्लोक 80

॥ 79 ॥ पाहिरामप्रभो ॥

लक्ष्मीकटाक्ष वीक्षणधार वृष्टि मा

कक्षयम्बुग कटाक्षिञ्चु रामप्रभो

श्लोक 81

॥ 80 ॥ पाहिरामप्रभो ॥

रावया अभयम्बु लीवया नास्वामी

नीवया गति देवराय रामप्रभो

श्लोक 82

॥ 81 ॥ पाहिरामप्रभो ॥

कावु कावुमटञ्चु काकासुरुडुराग

काचि रक्षिञ्चिनावय्य रामप्रभो

श्लोक 83

॥ 82 ॥ पाहिरामप्रभो ॥

देवदेवोत्तमा देवेन्द्रसन्नुता

काववेनन्नु श्रीरामचन्द्रप्रभो

श्लोक 84

॥ 83 ॥ पाहिरामप्रभो ॥

भावजजनक ना बाधलन्नियुमान्पि

ये विधम्बुनैन नेलु रामप्रभो

श्लोक 85

॥ 84 ॥ पाहिरामप्रभो ॥

श्रीवैष्णवुलपालि चिन्तामणिवि चाल

सेवगैकॊनि करुणचेयु रामप्रभो

श्लोक 86

॥ 85 ॥ पाहिरामप्रभो ॥

भावमुन मिमुभक्ति सेविञ्चु जनुलकु

कैवल्यमॊसगु श्रीरामचन्द्रप्रभो

श्लोक 87

॥ 86 ॥ पाहिरामप्रभो ॥

गोपालुरनु गूडि यावुलनु मेपि

आपदोद्धारकुडवैन रामप्रभो

श्लोक 88

॥ 87 ॥ पाहिरामप्रभो ॥

नापालि श्रीराम भूपालका ननु

कापाडराव गोपाल रामप्रभो

श्लोक 89

॥ 88 ॥ पाहिरामप्रभो ॥

सारमौशौर्य विस्तारमौ सुन्दरा

कारसद्भक्तमन्दार रामप्रभो

श्लोक 90

॥ 89 ॥ पाहिरामप्रभो ॥

शरणागतत्राण बिरुदाङ्कितम्बैन

वरमु नाकॊसगु येमरक रामप्रभो

श्लोक 91

॥ 90 ॥ पाहिरामप्रभो ॥

श्रीराम रामेति श्रेष्ठमन्त्रमु सारॆ

सारॆकुनु विन्तगा जदुव रामप्रभो

श्लोक 92

॥ 91 ॥ पाहिरामप्रभो ॥

श्रीराम नीनाम चिन्तनामृतपान

सारमे नादुमदि गोरु रामप्रभो

श्लोक 93

॥ 92 ॥ पाहिरामप्रभो ॥

चेरि मीपाद पद्माराधनमु चेय

कोरिनानय्य श्रीरामचन्द्रप्रभो

श्लोक 94

॥ 93 ॥ पाहिरामप्रभो ॥

घोरराक्षसगर्वहारि विश्वम्भरा

भूरिगुणसान्द्र विस्तार रामप्रभो

श्लोक 95

॥ 94 ॥ पाहिरामप्रभो ॥

मारीचमायानिवार शरसन्धान

धारुणीतनया विहार रामप्रभो

श्लोक 96

॥ 95 ॥ पाहिरामप्रभो ॥

परवासुदेव यक्षयपात्र मॊसगि न

न्नरसि पोषिम्पगदवय्य रामप्रभो

श्लोक 97

॥ 96 ॥ पाहिरामप्रभो ॥

परधनम्बुनु परस्त्रील नपेक्षिञ्चु

नरुकब्बुने मोक्षमरय रामप्रभो

श्लोक 98

॥ 97 ॥ पाहिरामप्रभो ॥

कामादिदुर्गुण स्तोमम्बुलडग मी

नामामृतमॆ दिक्कु रामचन्द्रप्रभो

श्लोक 99

॥ 98 ॥ पाहिरामप्रभो ॥

दुष्टुलगु दानवुल नष्टम्बुगा जेयगा

बुट्टितिवि कौसल्य पट्टि रामप्रभो

श्लोक 100

॥ 99 ॥ पाहिरामप्रभो ॥

कष्टपडलेनय्य पट्टाभिराम ना

किष्टसम्पदलिच्चि येलु रामप्रभो

श्लोक 101

॥ 100 ॥ पाहिरामप्रभो ॥

केशवायनिन भवपाशमुलॊलगु स

र्वेशकोटि शशिप्रकाश रामप्रभो

श्लोक 102

॥ 101 ॥ पाहिरामप्रभो ॥

नारायणा नीदु नामामृतं बॆपुडु

पारायणमु चेतु नेनु रामप्रभो

श्लोक 103

॥ 102 ॥ पाहिरामप्रभो ॥

माधवायनियु सम्मोदमुन निनुगॊल्चु

साधुसज्जनदयाम्भोधि रामप्रभो

श्लोक 104

॥ 103 ॥ पाहिरामप्रभो ॥

गोविन्द गोविन्द गोपालकृष्णयनि

गोपकुलु गॊनियाडु गोपरामप्रभो

श्लोक 105

॥ 104 ॥ पाहिरामप्रभो ॥

विष्णुना सर्ववर्धिष्णुना तत्त्व भू

यिष्णुना निर्मितं कृष्ण रामप्रभो

श्लोक 106

॥ 105 ॥ पाहिरामप्रभो ॥

श्रीधरा श्रीकरा श्रीनारसिंह गं

गाधर स्तोत्र यानन्द रामप्रभो

श्लोक 107

॥ 106 ॥ पाहिरामप्रभो ॥

मत्स्यमै जलधिलो जॊच्चि सोमकुद्रुञ्चि

तॆच्चि वेदमु लजुनकिस्ति रामप्रभो

श्लोक 108

॥ 107 ॥ पाहिरामप्रभो ॥

कूर्मरूपमु नॊन्दि कॊण्डमूपुनदाल्चि

कूर्मितो नमृतम्बुगूर्चि रामप्रभो

श्लोक 109

॥ 108 ॥ पाहिरामप्रभो ॥

वराहरूपमुन वसुधगॊम्मुननॆत्ति

सुरल रक्षिञ्चु दाशरथि रामप्रभो

श्लोक 110

॥ 109 ॥ पाहिरामप्रभो ॥

शरणन्न प्रह्लादु गरुणिञ्चि रक्षिम्प

नरसिंहमूर्तिवैनट्टि रामप्रभो

श्लोक 111

॥ 110 ॥ पाहिरामप्रभो ॥

वामनत्वमुन भूदानमडिगियु बलिनि

भूमिक्रिन्दनडञ्चि पॊल्चु रामप्रभो

श्लोक 112

॥ 111 ॥ पाहिरामप्रभो ॥

परशुरामुडनङ्ग नरपालकुलनॆल्ल

नरसिपॊरिकॊन्न दाशरथि रामप्रभो

श्लोक 113

॥ 112 ॥ पाहिरामप्रभो ॥

श्रीराममूर्तिवै यारावणुनि तलल्‌

धारुणिन्‌ पडगूर्चिनावु रामप्रभो

श्लोक 114

॥ 113 ॥ पाहिरामप्रभो ॥

हलधरुडवै धरास्थलिपालकुलनॆल्ल

बॊरिपुच्चि वॆलुगुमापालि रामप्रभो

श्लोक 115

॥ 114 ॥ पाहिरामप्रभो ॥

सिद्धसन्नुत मनोबद्धुण्डवै नीवु

बौद्धुण्डवैति प्रबुद्ध रामप्रभो

श्लोक 116

॥ 115 ॥ पाहिरामप्रभो ॥

कलिकिरूपमुदाल्चि कलियुगम्बुन नीवु

वॆलसितिवि भद्राद्रिनिलय रामप्रभो

श्लोक 117

॥ 116 ॥ पाहिरामप्रभो ॥

अव्ययुडवैन नीयवतारमुल जूचि

दिव्युलैनारु मुनुलय्य रामप्रभो

श्लोक 118

॥ 117 ॥ पाहिरामप्रभो ॥

श्रीरामनाममे वेलस्मरियिन्तु

स्वामि दयचेयु सम्पदनु रामप्रभो

श्लोक 119

॥ 118 ॥ पाहिरामप्रभो ॥

अप्प शेषशयन यॆप्पुडु निनु मरुव

नॊप्पुगा ब्रोवु वरदप्प रामप्रभो

श्लोक 120

॥ 119 ॥ पाहिरामप्रभो ॥

तॆप्परम्बुलुदीर्चि यिप्पुडेमरक नन्‌

द्रिप्पु बॆट्टक चेपट्टु रामप्रभो

श्लोक 121

॥ 120 ॥ पाहिरामप्रभो ॥

पट्टाभिराम नीपादपद्माश्रयुल

पालिम्पुमा भद्रशैलि रामप्रभो

श्लोक 122

॥ 121 ॥ पाहिरामप्रभो ॥

पट्टाभिराम निनु प्रभुडवनि नम्मितिनि

कष्टपॆट्टकनु चेपट्टु रामप्रभो

श्लोक 123

॥ 122 ॥ पाहिरामप्रभो ॥