Stotram - Sacred Scripture

Sri Ramachandra Krupalu

Sri Ramachandra Krupalu

Stotram
Rama
8 Verses
110%

श्री रामचन्द्र कृपालु

श्लोक 1

श्री रामचन्द्र कृपालु भजु मन हरण भव भय दारुणम् ।

नवकञ्ज लोचन कञ्ज मुख कर कञ्ज पद कञ्जारुणम्

श्लोक 2

कन्दर्प अगणित अमित छवि नव नील नीरज सुन्दरम् ।

वटपीत मानहु तडित रुचि शुचि नौमि जनक सुतावरम्

॥ 1 ॥

श्लोक 3

भजु दीन बन्धु दिनेश दानव दैत्यवंशनिकन्दनम् ।

रघुनन्द आनन्दकन्द कौशल चन्द दशरथ नन्दनम्

॥ 2 ॥

श्लोक 4

शिर मुकुट कुण्डल तिलक चारु उदार अङ्ग विभूषणम् ।

आजानुभुज शरचापधर सङ्ग्राम जित खरदूषणम्

॥ 3 ॥

श्लोक 5

इति वदति तुलसीदास शङ्कर शेष मुनि मनरञ्जनम् ।

मम हृदयकञ्ज निवास कुरु कामादिखलदलमञ्जनम्

॥ 4 ॥

श्लोक 6

छन्द

मनु जाहि राचेयु मिलहि सो वरु सहज सुन्दर सांवरो ।

करुणा निधान सुजान शीलु स्नेह जानत रावरो

॥ 5 ॥

श्लोक 7

एहि भान्ति गौरी असीस सुन सिय सहित हिय हरषित अली ।

तुलसी भवानिहि पूजी पुनि-पुनि मुदित मन मन्दिर चली

॥ 6 ॥

श्लोक 8

सोरठा

जानी गौरी अनुकूल सिय हिय हरषु न जाइ कहि ।

मञ्जुल मङ्गल मूल वाम अङ्ग फरकन लगे

॥ 7 ॥

श्लोक 9

श्री रामचन्द्र कृपालु | (Sri Ramachandra Krupalu) Lyrics | Vedic Tithi