Namavali - Sacred Scripture

Raghavendra Ashtottara Sata Namavali

Raghavendra Ashtottara Sata Namavali

Namavali
Unknown
11 Verses
110%

राघवेन्द्र अष्टोत्तर शत नामावलि

श्लोक 1

ॐ स्ववाग्दे व तासरि द्ब क्तविमली कर्त्रे नमः

ॐ राघवेन्द्राय नमः

ॐ सकल प्रदात्रे नमः

ॐ भ क्तौघ सम्भे दन द्रुष्टि वज्राय नमः

ॐ क्षमा सुरॆन्द्राय नमः

ॐ हरि पादकञ्ज निषेव णालब्दि समस्ते सम्पदे नमः

ॐ देव स्वभावाय नमः

ॐ दि विजद्रुमाय नमः

ॐ इष्ट प्रदात्रे नमः

ॐ भव्य स्वरूपाय नमः

श्लोक 2

ॐ भ व दुःखतूल सङ्घाग्निचर्याय नमः

ॐ सुख धैर्य शालिने नमः

ॐ समस्त दुष्टग्र हनिग्र हेशाय नमः

ॐ दुरत्य यो पप्ल सिन्धु सेतवे नमः

ॐ निरस्त दोषाय नमः

ॐ निर वध्यदेहाय नमः

ॐ प्रत्यर्ध मूकत्वविधान भाषाय नमः

ॐ विद्वत्सरि ज्ञेय महा विशेषाय नमः

ॐ वा ग्वैखरी निर्जित भव्य शे षाय नमः

ॐ सन्तान सम्पत्सरिशुद्दभक्ती विज्ञान नमः

॥ 10 ॥

श्लोक 3

ॐ वाग्दॆ हसुपाटवादि धात्रे नमः

ॐ शरिरोत्ध समस्त दोष हन्त्रॆ नमः

ॐ श्री गुरु राघवेन्द्राय नमः

ॐ तिरस्कृत सुन्नदी जलपादो दक महिमावते नमः

ॐ दुस्ता पत्रय नाशनाय नमः

ॐ महावन्द्यासुपुत्र दायकाय नमः

ॐ व्यङ्गय स्वङ्ग समृद्द दाय नमः

ॐ ग्रहपापा पहयॆ नमः

ॐ दुरितकानदाव भुत स्वभक्ति दर्श नाय नमः

॥20 ॥

श्लोक 4

ॐ सर्वतन्त्र स्वतन्त्रय नमः

ॐ श्रीमध्वमतवर्दनाय नमः

ॐ विजयेन्द्र करा ब्जोत्द सुदोन्द्रवर पूत्रकाय नमः

ॐ यतिराजये नमः

ॐ गुरुवे नमः

ॐ भया पहाय नमः

ॐ ज्ञान भक्ती सुपुत्रायुर्यशः

श्री पुण्यवर्द नाय नमः

ॐ प्रतिवादि भयस्वन्त भेद चिह्नार्ध राय नमः

ॐ सर्व विद्याप्रवीणाय नमः

ॐ अपरोक्षि कृत श्रीशाय नमः

॥ 30 ॥

श्लोक 5

ॐ अपेक्षित प्रदात्रे नमः

ॐ दायादाक्षिण्य वैराग्य वाक्पाटव मुखाङ्कि ताय नमः

ॐ शापानुग्र हशाक्तय नमः

ॐ अज्ञान विस्मृति ब्रान्ति नमः

ॐ संशयापस्मृति क्ष यदोष नाशकाय नमः

ॐ अष्टाक्षर जपेस्टार्द प्रदात्रे नमः

ॐ अध्यात्मय समुद्भवकायज दोष हन्त्रे नमः

ॐ सर्व पुण्यर्ध प्रदात्रे नमः

ॐ कालत्र यप्रार्ध नाकर्त्यहिकामुष्मक सर्वस्टा प्रदात्रे नमः

ॐ अगम्य महिम्नेनमः

॥ 40 ॥

श्लोक 6

ॐ महयशशे नमः

ॐ मद्वमत दुग्दाब्दि चन्द्राय नमः

ॐ अनघाय नमः

ॐ यधाशक्ति प्रदक्षिण कृत सर्वयात्र फलदात्रे नमः

ॐ शिरोधारण सर्वतीर्ध स्नान फतदातृ समव बन्दावन गत जालय नमः

ॐ नमः करण सर्वभिस्टा धार्ते नमः

ॐ सङ्कीर्तन वेदाद्यर्द ज्ञान दात्रे नमः

ॐ संसार मग्नजनोद्दार कर्त्रे नमः

ॐ कुस्टदि रोग निवर्त काय नमः

ॐ अन्ध दिव्य दृष्टि धात्रे नमः

॥ 50 ॥

श्लोक 7

ॐ एड मूकवाक्सतुत्व प्रदात्रे नमः

ॐ पूर्णा यु:प्रदात्रे नमः

ॐ पूर्ण सम्प त्स्र दात्रे नमः

ॐ कुक्षि गत सर्वदोषम्नानमः

ॐ पङ्गु खञ्ज समीचानाव यव नमः

ॐ भुत प्रेत पिशाचादि पिडाघ्नेनमः

ॐ दीप संयोजनज्ञान पुत्रा दात्रे नमः

ॐ भव्य ज्ञान भक्त्यदि वर्दनाय नमः

ॐ सर्वाभिष्ट प्रदाय नमः

ॐ राजचोर महा व्या घ्र सर्पन क्रादि पिडनघ्नेनमः

॥ 60 ॥

श्लोक 8

ॐ स्वस्तोत्र परनेस्टार्ध समृद्ध दय नमः

ॐ उद्य त्प्रुद्योन धर्मकूर्मासन स्दाय नमः

ॐ खद्य खद्यो तन द्योत प्रतापाय नमः

ॐ श्रीराममानसाय नमः

ॐ दृत काषायव सनाय नमः

ॐ तुलसिहार वक्ष नमः

ॐ दोर्दण्ड विलसद्दण्ड कमण्डलु विराजिताय नमः

ॐ अभय ज्ञान समुद्राक्ष मालाशीलक राम्बुजाय नमः

ॐ योगेन्द्र वन्द्य पादाब्जाय नमः

ॐ पापाद्रि पाटन वज्राय नमः

॥ 70 ॥

श्लोक 9

ॐ क्षमा सुर गणाधी शाय नमः

ॐ हरि सेवलब्दि सर्व सम्पदे नमः

ॐ तत्व प्रदर्शकाय नमः

ॐ भव्यकृते नमः

ॐ बहुवादि विजयिने नमः

ॐ पुण्यवर्दन पादाब्जाभि षेक जल सञ्चायाय नमः

ॐ द्युनदी तुल्यसद्गुणाय नमः

ॐ भक्ताघविद्वंसकर निजमूरि प्रदर्शकाय नमः

॥ 80 ॥

श्लोक 10

ॐ जगद्गुर वे नमः कृपानिध ये नमः

ॐ सर्वशास्त्र विशारदाय नमः

ॐ निखिलेन्द्रि यदोष घ्ने नमः

ॐ अष्टाक्षर मनूदि ताय नमः

ॐ सर्वसौख्यकृते नमः

ॐ मृत पोत प्राणादात्रे नमः

ॐ वेदि स्धपुरुषोज्जी विने नमः

ॐ वह्निस्त मालिकोद्द र्त्रे नमः

ॐ समग्र टीक व्याख्यात्रे नमः

ॐ भाट्ट सङ्ग्र हकृते नमः

॥ 90 ॥

श्लोक 11

ॐ सुधापर मिलोद्द र्त्रे नमः

ॐ अपस्मारा पह र्त्रे नमः

ॐ उपनिष त्खण्डार्ध कृते नमः

ॐ ऋ ग्व्यख्यान कृदाचार्याय नमः

ॐ मन्त्रालय निवसिने नमः

ॐ न्याय मुक्ता वलीक र्त्रे नमः

ॐ चन्द्रि काव्याख्याक र्त्रे नमः

ॐ सुन्तन्त्र दीपिका र्त्रे नमः

ॐ गीतार्द सङ्ग्रहकृते नमः

॥ 100 ॥

श्लोक 12