Stotram - Sacred Scripture

Chandrasekhara Ashtakam

Chandrasekhara Ashtakam

Stotram
Chandra
9 Verses
110%

चन्द्रशेखराष्टकम्

श्लोक 1

चन्द्रशेखर चन्द्रशेखर चन्द्रशेखर पाहिमाम् ।

चन्द्रशेखर चन्द्रशेखर चन्द्रशेखर रक्षमाम् ॥ (2)

रत्नसानु शरासनं रजताद्रि शृङ्ग निकेतनं

शिञ्जिनीकृत पन्नगेश्वर मच्युतानल सायकम् ।

क्षिप्रदग्द पुरत्रयं त्रिदशालयै-रभिवन्दितं

चन्द्रशेखरमाश्रये मम किं करिष्यति वै यमः

श्लोक 2

पञ्चपादप पुष्पगन्ध पदाम्बुज द्वयशोभितं

फाललोचन जातपावक दग्ध मन्मध विग्रहम् ।

भस्मदिग्ध कलेबरं भवनाशनं भव मव्ययं

चन्द्रशेखर चन्द्रशेखर चन्द्रशेखर रक्षमाम्

॥ 1 ॥

श्लोक 3

मत्तवारण मुख्यचर्म कृतोत्तरीय मनोहरं

पङ्कजासन पद्मलोचन पूजिताङ्घ्रि सरोरुहम् ।

देव सिन्धु तरङ्ग श्रीकर सिक्त शुभ्र जटाधरं

चन्द्रशेखर चन्द्रशेखर चन्द्रशेखर पाहिमाम्

॥ 2 ॥

श्लोक 4

यक्ष राजसखं भगाक्ष हरं भुजङ्ग विभूषणम्

शैलराज सुता परिष्कृत चारुवाम कलेबरम् ।

क्षेल नीलगलं परश्वध धारिणं मृगधारिणम्

चन्द्रशेखर चन्द्रशेखर चन्द्रशेखर पाहिमाम्

॥ 3 ॥

श्लोक 5

कुण्डलीकृत कुण्डलीश्वर कुण्डलं वृषवाहनं

नारदादि मुनीश्वर स्तुतवैभवं भुवनेश्वरम् ।

अन्धकान्तक माश्रितामर पादपं शमनान्तकं

चन्द्रशेखर चन्द्रशेखर चन्द्रशेखर रक्षमाम्

॥ 4 ॥

श्लोक 6

भेषजं भवरोगिणा मखिलापदा मपहारिणं

दक्षयज्ञ विनाशनं त्रिगुणात्मकं त्रिविलोचनम् ।

भक्ति मुक्ति फलप्रदं सकलाघ सङ्घ निबर्हणं

चन्द्रशेखर चन्द्रशेखर चन्द्रशेखर रक्षमाम्

॥ 5 ॥

श्लोक 7

भक्तवत्सल-मर्चितं निधिमक्षयं हरिदम्बरं

सर्वभूत पतिं परात्पर-मप्रमेय मनुत्तमम् ।

सोमवारिन भूहुताशन सोम पाद्यखिलाकृतिं

चन्द्रशेखर चन्द्रशेखर चन्द्रशेखर पाहिमाम्

॥ 6 ॥

श्लोक 8

विश्वसृष्टि विधायकं पुनरेवपालन तत्परं

संहरं तमपि प्रपञ्च मशेषलोक निवासिनम् ।

क्रीडयन्त महर्निशं गणनाथ यूथ समन्वितं

चन्द्रशेखर चन्द्रशेखर चन्द्रशेखर रक्षमाम्

॥ 7 ॥

श्लोक 9

मृत्युभीत मृकण्डुसूनुकृतस्तवं शिवसन्निधौ

यत्र कुत्र च यः पठेन्न हि तस्य मृत्युभयं भवेत् ।

पूर्णमायुररोगतामखिलार्थसम्पदमादरं

चन्द्रशेखर एव तस्य ददाति मुक्तिमयत्नतः

॥ 8 ॥

श्लोक 10

चन्द्रशेखराष्टकम् | (Chandrasekhara Ashtakam) Lyrics | Vedic Tithi