Stotram - Sacred Scripture

Vishvambhari Stuti

Vishvambhari Stuti

Stotram
Unknown
12 Verses
110%

विश्वम्भरी स्तुति

श्लोक 1

विश्वम्भरी अखिल विश्व तनी जनेता

विद्या धरी वदनमा वसजो विधाता

दुर्बुद्धिने दूर करी सदबुद्धि आपो

माम पाहि ॐ भगवती भव दुःख कापो

श्लोक 2

भूलो पडयी भवरने भटकू भवानी

सूझे नहीं लगिर कोई दिशा जवानी

भासे भयङ्कर वाली मन ना उतापो

माम पाहि ॐ भगवती भव दुःख कापो

॥ 1 ॥

श्लोक 3

आ रङ्कने उगरावा नथी कोई आरो

जन्माण्ड छू जननी हु ग्रही बाल तारो

ना शु सुनो भगवती शिशु ना विलापो

माम पाहि ॐ भगवती भव दुःख कापो

॥ 2 ॥

श्लोक 4

मा कर्म जन्मा कथनी करता विचारू

आ स्रुष्टिमा तुज विना नथी कोई मारू

कोने कहू कथन योग तनो बलापो

माम पाहि ॐ भगवती भव दुःख कापो

॥ 3 ॥

श्लोक 5

हूवो काम क्रोध मद मोह थकी छकेलो

आदम्बरे अति घनो मदथी बकेलो

दोषों थकी दूषित ना करी माफ़ पापो

माम पाहि ॐ भगवती भव दुःख कापो

॥ 4 ॥

श्लोक 6

ना शाश्त्रना श्रवण नु पयपान किधू

ना मन्त्र के स्तुति कथा नथी काई किधू

श्रद्धा धरी नथी करा तव नाम जापो

माम पाहि ॐ भगवती भव दुःख कापो

॥ 5 ॥

श्लोक 7

रे रे भवानी बहु भूल थी छे मारी

आ जवोइन्दगी थी मने अतिशे अकारि

दोषों प्रजाली सगला तवा छाप छापो

माम पाहि ॐ भगवती भव दुःख कापो

॥ 6 ॥

श्लोक 8

खाली न कोई स्थल छे विण आप धारो

ब्रह्माण्डमा अणु अणु महि वास तारो

शक्तिन माप गणवा अगणीत मापों

माम पाहि ॐ भगवती भव दुःख कापो

॥ 7 ॥

श्लोक 9

पापे प्रपञ्च करवा बधी वाते पुरो

खोटो खरो भगवती पण हूँ तमारो

जद्यान्धकार दूर सदबुध्ही आपो

माम पाहि ॐ भगवती भव दुःख कापो

॥ 8 ॥

श्लोक 10

शीखे सुने रसिक चन्दज एक चित्ते

तेना थकी विविधः ताप तलेक चिते

वाधे विशेष वली अम्बा तना प्रतापो

माम पाहि ॐ भगवती भव दुःख कापो

॥ 9 ॥

श्लोक 11

श्री सदगुरु शरणमा रहीने भजु छू

रात्री दिने भगवती तुजने भजु छू

सदभक्त सेवक तना परिताप छापो

माम पाहि ॐ भगवती भव दुःख कापो

॥ 10 ॥

श्लोक 12

अन्तर विशे अधिक उर्मी तता भवानी

ग्AUवो स्तुति तव बले नमिने मृगानी

संसारना सकल रोग समूल कापो

माम पाहि ॐ भगवती भव दुःख कापो

॥ 11 ॥

श्लोक 13

विश्वम्भरी स्तुति | (Vishvambhari Stuti) Lyrics | Vedic Tithi