Stotram - Sacred Scripture

Suvarnamala Stuti

Suvarnamala Stuti

Stotram
Unknown
50 Verses
110%

सुवर्णमाला स्तुति

श्लोक 1

अथ कथमपि मद्रासनां त्वद्गुणलेशैर्विशोधयामि विभो ।

साम्ब सदाशिव शम्भो शङ्कर शरणं मे तव चरणयुगम्

श्लोक 2

आखण्डलमदखण्डनपण्डित तण्डुप्रिय चण्डीश विभो ।

साम्ब सदाशिव शम्भो शङ्कर शरणं मे तव चरणयुगम्

॥ 1 ॥

श्लोक 3

इभचर्माम्बर शम्बररिपुवपुरपहरणोज्ज्वलनयन विभो ।

साम्ब सदाशिव शम्भो शङ्कर शरणं मे तव चरणयुगम्

॥ 2 ॥

श्लोक 4

ईश गिरीश नरेश परेश महेश बिलेशयभूषण भो ।

साम्ब सदाशिव शम्भो शङ्कर शरणं मे तव चरणयुगम्

॥ 3 ॥

श्लोक 5

उमया दिव्यसुमङ्गलविग्रहयालिङ्गितवामाङ्ग विभो ।

साम्ब सदाशिव शम्भो शङ्कर शरणं मे तव चरणयुगम्

॥ 4 ॥

श्लोक 6

ऊरीकुरु मामज्ञमनाथं दूरीकुरु मे दुरितं भो ।

साम्ब सदाशिव शम्भो शङ्कर शरणं मे तव चरणयुगम्

॥ 5 ॥

श्लोक 7

ऋषिवरमानसहंस चराचरजननस्थितिलयकारण भो ।

साम्ब सदाशिव शम्भो शङ्कर शरणं मे तव चरणयुगम्

॥ 6 ॥

श्लोक 8

ॠक्षाधीशकिरीट महोक्षारूढ विधृतरुद्राक्ष विभो ।

साम्ब सदाशिव शम्भो शङ्कर शरणं मे तव चरणयुगम्

॥ 7 ॥

श्लोक 9

लुवर्णद्वन्द्वमवृन्तसुकुसुममिवाङ्घ्रौ तवार्पयामि विभो ।

साम्ब सदाशिव शम्भो शङ्कर शरणं मे तव चरणयुगम्

॥ 8 ॥

श्लोक 10

एकं सदिति श्रुत्या त्वमेव सदसीत्युपास्महे मृड भो ।

साम्ब सदाशिव शम्भो शङ्कर शरणं मे तव चरणयुगम्

॥ 9 ॥

श्लोक 11

ऐक्यं निजभक्तेभ्यो वितरसि विश्वम्भरोऽत्र साक्षी भो ।

साम्ब सदाशिव शम्भो शङ्कर शरणं मे तव चरणयुगम्

॥ 10 ॥

श्लोक 12

ओमिति तव निर्देष्ट्री मायास्माकं मृडोपकर्त्री भो ।

साम्ब सदाशिव शम्भो शङ्कर शरणं मे तव चरणयुगम्

॥ 11 ॥

श्लोक 13

औदास्यं स्फुटयति विषयेषु दिगम्बरता च तवैव विभो ।

साम्ब सदाशिव शम्भो शङ्कर शरणं मे तव चरणयुगम्

॥ 12 ॥

श्लोक 14

अन्तःकरणविशुद्धिं भक्तिं च त्वयि सतीं प्रदेहि विभो ।

साम्ब सदाशिव शम्भो शङ्कर शरणं मे तव चरणयुगम्

॥ 13 ॥

श्लोक 15

अस्तोपाधिसमस्तव्यस्तै रूपैर्जगन्मयोऽसि विभो ।

साम्ब सदाशिव शम्भो शङ्कर शरणं मे तव चरणयुगम्

॥ 14 ॥

श्लोक 16

करुणावरुणालय मयि दास उदासस्तवोचितो न हि भो ।

साम्ब सदाशिव शम्भो शङ्कर शरणं मे तव चरणयुगम्

॥ 15 ॥

श्लोक 17

खलसहवासं विघटय घटय सतामेव सङ्गमनिशं भो ।

साम्ब सदाशिव शम्भो शङ्कर शरणं मे तव चरणयुगम्

॥ 16 ॥

श्लोक 18

गरलं जगदुपकृतये गिलितं भवता समोऽस्ति कोऽत्र विभो ।

साम्ब सदाशिव शम्भो शङ्कर शरणं मे तव चरणयुगम्

॥ 17 ॥

श्लोक 19

घनसारगौरगात्र प्रचुरजटाजूटबद्धगङ्ग विभो ।

साम्ब सदाशिव शम्भो शङ्कर शरणं मे तव चरणयुगम्

॥ 18 ॥

श्लोक 20

ज्ञप्तिः सर्वशरीरेष्वखण्डिता या विभाति सा त्वं भो ।

साम्ब सदाशिव शम्भो शङ्कर शरणं मे तव चरणयुगम्

॥ 19 ॥

श्लोक 21

चपलं मम हृदयकपिं विषयद्रुचरं दृढं बधान विभो ।

साम्ब सदाशिव शम्भो शङ्कर शरणं मे तव चरणयुगम्

॥ 20 ॥

श्लोक 22

छाया स्थाणोरपि तव तापं नमतां हरत्यहो शिव भो ।

साम्ब सदाशिव शम्भो शङ्कर शरणं मे तव चरणयुगम्

॥ 21 ॥

श्लोक 23

जय कैलासनिवास प्रमथगणाधीश भूसुरार्चित भो ।

साम्ब सदाशिव शम्भो शङ्कर शरणं मे तव चरणयुगम्

॥ 22 ॥

श्लोक 24

झणुतकझङ्किणुझणुतत्किटतक-शब्दैर्नटसि महानट भो ।

साम्ब सदाशिव शम्भो शङ्कर शरणं मे तव चरणयुगम्

॥ 23 ॥

श्लोक 25

ज्ञानं विक्षेपावृतिरहितं कुरु मे गुरुस्त्वमेव विभो ।

साम्ब सदाशिव शम्भो शङ्कर शरणं मे तव चरणयुगम्

॥ 24 ॥

श्लोक 26

टङ्कारस्तव धनुषो दलयति हृदयं द्विषामशनिरिव भो ।

साम्ब सदाशिव शम्भो शङ्कर शरणं मे तव चरणयुगम्

॥ 25 ॥

श्लोक 27

ठाकृतिरिव तव माया बहिरन्तः शून्यरूपिणी खलु भो ।

साम्ब सदाशिव शम्भो शङ्कर शरणं मे तव चरणयुगम्

॥ 26 ॥

श्लोक 28

डम्बरमम्बुरुहामपि दलयत्यनघं त्वदङ्घ्रियुगलं भो ।

साम्ब सदाशिव शम्भो शङ्कर शरणं मे तव चरणयुगम्

॥ 27 ॥

श्लोक 29

ढक्काक्षसूत्रशूलद्रुहिणकरोटीसमुल्लसत्कर भो ।

साम्ब सदाशिव शम्भो शङ्कर शरणं मे तव चरणयुगम्

॥ 28 ॥

श्लोक 30

णाकारगर्भिणी चेच्छुभदा ते शरगतिर्नृणामिह भो ।

साम्ब सदाशिव शम्भो शङ्कर शरणं मे तव चरणयुगम्

॥ 29 ॥

श्लोक 31

तव मन्वतिसञ्जपतः सद्यस्तरति नरो हि भवाब्धिं भो ।

साम्ब सदाशिव शम्भो शङ्कर शरणं मे तव चरणयुगम्

॥ 30 ॥

श्लोक 32

थूत्कारस्तस्य मुखे भूयात्ते नाम नास्ति यस्य विभो ।

साम्ब सदाशिव शम्भो शङ्कर शरणं मे तव चरणयुगम्

॥ 31 ॥

श्लोक 33

दयनीयश्च दयालुः कोऽस्ति मदन्यस्त्वदन्य इह वद भो ।

साम्ब सदाशिव शम्भो शङ्कर शरणं मे तव चरणयुगम्

॥ 32 ॥

श्लोक 34

धर्मस्थापनदक्ष त्र्यक्ष गुरो दक्षयज्ञशिक्षक भो ।

साम्ब सदाशिव शम्भो शङ्कर शरणं मे तव चरणयुगम्

॥ 33 ॥

श्लोक 35

ननु ताडितोऽसि धनुषा लुब्धधिया त्वं पुरा नरेण विभो ।

साम्ब सदाशिव शम्भो शङ्कर शरणं मे तव चरणयुगम्

॥ 34 ॥

श्लोक 36

परिमातुं तव मूर्तिं नालमजस्तत्परात्परोऽसि विभो ।

साम्ब सदाशिव शम्भो शङ्कर शरणं मे तव चरणयुगम्

॥ 35 ॥

श्लोक 37

फलमिह नृतया जनुषस्त्वत्पदसेवा सनातनेश विभो ।

साम्ब सदाशिव शम्भो शङ्कर शरणं मे तव चरणयुगम्

॥ 36 ॥

श्लोक 38

बलमारोग्यं चायुस्त्वद्गुणरुचितां चिरं प्रदेहि विभो ।

साम्ब सदाशिव शम्भो शङ्कर शरणं मे तव चरणयुगम्

॥ 37 ॥

श्लोक 39

भगवन्भर्ग भयापह भूतपते भूतिभूषिताङ्ग विभो ।

साम्ब सदाशिव शम्भो शङ्कर शरणं मे तव चरणयुगम्

॥ 38 ॥

श्लोक 40

महिमा तव न हि माति श्रुतिषु हिमानीधरात्मजाधव भो ।

साम्ब सदाशिव शम्भो शङ्कर शरणं मे तव चरणयुगम्

॥ 39 ॥

श्लोक 41

यमनियमादिभिरङ्गैर्यमिनो हृदये भजन्ति स त्वं भो ।

साम्ब सदाशिव शम्भो शङ्कर शरणं मे तव चरणयुगम्

॥ 40 ॥

श्लोक 42

रज्जावहिरिव शुक्तौ रजतमिव त्वयि जगन्ति भान्ति विभो ।

साम्ब सदाशिव शम्भो शङ्कर शरणं मे तव चरणयुगम्

॥ 41 ॥

श्लोक 43

लब्ध्वा भवत्प्रसादाच्चक्रं विधुरवति लोकमखिलं भो ।

साम्ब सदाशिव शम्भो शङ्कर शरणं मे तव चरणयुगम्

॥ 42 ॥

श्लोक 44

वसुधातद्धरतच्छयरथमौर्वीशर पराकृतासुर भो ।

साम्ब सदाशिव शम्भो शङ्कर शरणं मे तव चरणयुगम्

॥ 43 ॥

श्लोक 45

शर्व देव सर्वोत्तम सर्वद दुर्वृत्तगर्वहरण विभो ।

साम्ब सदाशिव शम्भो शङ्कर शरणं मे तव चरणयुगम्

॥ 44 ॥

श्लोक 46

षड्रिपुषडूर्मिषड्विकारहर सन्मुख षण्मुखजनक विभो ।

साम्ब सदाशिव शम्भो शङ्कर शरणं मे तव चरणयुगम्

॥ 45 ॥

श्लोक 47

सत्यं ज्ञानमनन्तं ब्रह्मेत्येतल्लक्षणलक्षित भो ।

साम्ब सदाशिव शम्भो शङ्कर शरणं मे तव चरणयुगम्

॥ 46 ॥

श्लोक 48

हाहाहूहूमुखसुरगायकगीतापदानपद्य विभो ।

साम्ब सदाशिव शम्भो शङ्कर शरणं मे तव चरणयुगम्

॥ 47 ॥

श्लोक 49

लादिर्न हि प्रयोगस्तदन्तमिह मङ्गलं सदास्तु विभो ।

साम्ब सदाशिव शम्भो शङ्कर शरणं मे तव चरणयुगम्

॥ 48 ॥

श्लोक 50

क्षणमिव दिवसान्नेष्यति त्वत्पदसेवाक्षणोत्सुकः शिव भो ।

साम्ब सदाशिव शम्भो शङ्कर शरणं मे तव चरणयुगम्

॥ 49 ॥

श्लोक 51

इति श्रीमत्परमहंसपरिव्राजकाचार्यस्य श्रीगोविन्दभगवत्पूज्यपादशिष्यस्य श्रीमच्छङ्करभगवतः कृतौ सुवर्णमाला स्तुतिः सम्पूर्णा ॥