Stotram - Sacred Scripture

Sri Venkateswara Stotram

Sri Venkateswara Stotram

Stotram
Unknown
11 Verses
110%

श्री वेङ्कटेश्वर स्तोत्रम्

श्लोक 1

कमलाकुच चूचुक कुङ्कमतो

नियतारुणि तातुल नीलतनो ।

कमलायत लोचन लोकपते

विजयीभव वेङ्कट शैलपते

श्लोक 2

सचतुर्मुख षण्मुख पञ्चमुख

प्रमुखा खिलदैवत मौलिमणे ।

शरणागत वत्सल सारनिधे

परिपालय मां वृष शैलपते

॥ 1 ॥

श्लोक 3

अतिवेलतया तव दुर्विषहै

रनु वेलकृतै रपराधशतैः ।

भरितं त्वरितं वृष शैलपते

परया कृपया परिपाहि हरे

॥ 2 ॥

श्लोक 4

अधि वेङ्कट शैल मुदारमते-

र्जनताभि मताधिक दानरतात् ।

परदेवतया गदितानिगमैः

कमलादयितान्न परङ्कलये

॥ 3 ॥

श्लोक 5

कल वेणुर वावश गोपवधू

शत कोटि वृतात्स्मर कोटि समात् ।

प्रति पल्लविकाभि मतात्-सुखदात्

वसुदेव सुतान्न परङ्कलये

॥ 3 ॥

श्लोक 6

अभिराम गुणाकर दाशरथे

जगदेक धनुर्थर धीरमते ।

रघुनायक राम रमेश विभो

वरदो भव देव दया जलधे

॥ 4 ॥

श्लोक 7

अवनी तनया कमनीय करं

रजनीकर चारु मुखाम्बुरुहम् ।

रजनीचर राजत मोमि हिरं

महनीय महं रघुराममये

॥ 5 ॥

श्लोक 8

सुमुखं सुहृदं सुलभं सुखदं

स्वनुजं च सुकायम मोघशरम् ।

अपहाय रघूद्वय मन्यमहं

न कथञ्चन कञ्चन जातुभजे

॥ 6 ॥

श्लोक 9

विना वेङ्कटेशं न नाथो न नाथः

सदा वेङ्कटेशं स्मरामि स्मरामि ।

हरे वेङ्कटेश प्रसीद प्रसीद

प्रियं वेङ्कटॆश प्रयच्छ प्रयच्छ

॥ 7 ॥

श्लोक 10

अहं दूरदस्ते पदां भोजयुग्म

प्रणामेच्छया गत्य सेवां करोमि ।

सकृत्सेवया नित्य सेवाफलं त्वं

प्रयच्छ प्रयच्छ प्रभो वेङ्कटेश

॥ 8 ॥

श्लोक 11

अज्ञानिना मया दोषा न शेषान्विहितान् हरे ।

क्षमस्व त्वं क्षमस्व त्वं शेषशैल शिखामणे

॥ 9 ॥

श्लोक 12