Stotram - Sacred Scripture

Sri Ganapathi Talam

Sri Ganapathi Talam

Stotram
Unknown
11 Verses
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श्री गणपति तालम्

श्लोक 1

विकटोत्कटसुन्दरदन्तिमुखं

भुजगेन्द्रसुसर्पगदाभरणम् ।

गजनीलगजेन्द्र गणाधिपतिं

प्रणतोऽस्मि विनायक हस्तिमुखम्

श्लोक 2

सुर सुर गणपति सुन्दरकेशं

ऋषि ऋषि गणपति यज्ञसमानम् ।

भव भव गणपति पद्मशरीरं

जय जय गणपति दिव्यनमस्ते

॥ 1 ॥

श्लोक 3

गजमुखवक्त्रं गिरिजापुत्रं

गणगुणमित्रं गणपतिमीशप्रियम्

॥ 2 ॥

श्लोक 4

करधृतपरशुं कङ्कणपाणिं

कबलितपद्मरुचिम् ।

सुरपतिवन्द्यं सुन्दरनृत्तं

सुरचितमणिमकुटम्

॥ 3 ॥

श्लोक 5

प्रणमत देवं प्रकटित तालं

षड्गिरि तालमिदम् ।

तत्तत् षड्गिरि तालमिदं

तत्तत् षड्गिरि तालमिदम्

॥ 4 ॥

श्लोक 6

लम्बोदरवर कुञ्जासुरकृत कुङ्कुमवर्णधरम् ।

श्वेतसशृङ्गं मोदकहस्तं प्रीतिसपनसफलम्

॥ 5 ॥

श्लोक 7

नयनत्रयवर नागविभूषित नानागणपतिदं तत्तत्

नयनत्रयवर नागविभूषित नानागणपतिदं तत्तत्

नानागणपति तं तत्तत् नानागणपतिदम्

॥ 6 ॥

श्लोक 8

धवलित जलधरधवलित चन्द्रं

फणिमणिकिरणविभूषित खड्गम् ।

तनुतनुविषहर शूलकपालं

हर हर शिव शिव गणपतिमभयम्

॥ 7 ॥

श्लोक 9

कटतट विगलितमदजल जलधित-

गणपतिवाद्यमिदं

कटतट विगलितमदजल जलधित-

गणपतिवाद्यमिदं

तत्तत् गणपतिवाद्यमिदं

तत्तत् गणपतिवाद्यमिदम्

॥ 8 ॥

श्लोक 10

तत्तदिं नं तरिकु तरिजणकु कुकु तद्दि

कुकु तकिट डिण्डिङ्गु डिगुण कुकु तद्दि

तत्त झं झं तरित

त झं झं तरित

तकत झं झं तरित

त झं झं तरित

तरिदणत दणजणुत जणुदिमित

किटतक तरिकिटतों

तकिट किटतक तरिकिटतों

तकिट किटतक तरिकिटतों ताम्

॥ 9 ॥

श्लोक 11

तकतकिट तकतकिट तकतकिट तत्तों

शशिकलित शशिकलित मौलिनं शूलिनम् ।

तकतकिट तकतकिट तकतकिट तत्तों

विमलशुभकमलजलपादुकं पाणिनम् ।

धित्तकिट धित्तकिट धित्तकिट तत्तों

प्रमथगणगुणकथितशोभनं शोभितम् ।

धित्तकिट धित्तकिट धित्तकिट तत्तों

पृथुलभुजसरसिज विषाणकं पोषणम् ।

तकतकिट तकतकिट तकतकिट तत्तों

पनसफलकदलिफलमोदनं मोदकम् ।

धित्तकिट धित्तकिट धित्तकिट तत्तों

प्रणतगुरु शिवतनय गणपति तालनम् ।

गणपति तालनं गणपति तालनम्

॥ 10 ॥

श्लोक 12