Stotram - Sacred Scripture

Sree Annapurna Stotram

Sree Annapurna Stotram

Stotram
Unknown
13 Verses
110%

श्री अन्नपूर्णा स्तोत्रम्

श्लोक 1

नित्यानन्दकरी वराभयकरी सौन्दर्य रत्नाकरी

निर्धूताखिल घोर पावनकरी प्रत्यक्ष माहेश्वरी ।

प्रालेयाचल वंश पावनकरी काशीपुराधीश्वरी

भिक्षां देहि कृपावलम्बनकरी मातान्नपूर्णेश्वरी

श्लोक 2

नाना रत्न विचित्र भूषणकरि हेमाम्बराडम्बरी

मुक्ताहार विलम्बमान विलसत्-वक्षोज कुम्भान्तरी ।

काश्मीरागरु वासिता रुचिकरी काशीपुराधीश्वरी

भिक्षां देहि कृपावलम्बनकरी मातान्नपूर्णेश्वरी

॥ 1 ॥

श्लोक 3

योगानन्दकरी रिपुक्षयकरी धर्मैक्य निष्ठाकरी

चन्द्रार्कानल भासमान लहरी त्रैलोक्य रक्षाकरी ।

सर्वैश्वर्यकरी तपः फलकरी काशीपुराधीश्वरी

भिक्षां देहि कृपावलम्बनकरी मातान्नपूर्णेश्वरी

॥ 2 ॥

श्लोक 4

कैलासाचल कन्दरालयकरी गौरी-ह्युमाशाङ्करी

कौमारी निगमार्थ-गोचरकरी-ह्योङ्कार-बीजाक्षरी ।

मोक्षद्वार-कवाटपाटनकरी काशीपुराधीश्वरी

भिक्षां देहि कृपावलम्बनकरी मातान्नपूर्णेश्वरी

॥ 3 ॥

श्लोक 5

दृश्यादृश्य-विभूति-वाहनकरी ब्रह्माण्ड-भाण्डोदरी

लीला-नाटक-सूत्र-खेलनकरी विज्ञान-दीपाङ्कुरी ।

श्रीविश्वेशमनः-प्रसादनकरी काशीपुराधीश्वरी

भिक्षां देहि कृपावलम्बनकरी मातान्नपूर्णेश्वरी

॥ 4 ॥

श्लोक 6

उर्वीसर्वजयेश्वरी भगवती [जयकरी] माता कृपासागरी

वेणी-नीलसमान-कुन्तलधरी नित्यान्न-दानेश्वरी ।

साक्षान्मोक्षकरी सदा शुभकरी काशीपुराधीश्वरी

भिक्षां देहि कृपावलम्बनकरी मातान्नपूर्णेश्वरी

॥ 5 ॥

श्लोक 7

आदिक्षान्त-समस्तवर्णनकरी शम्भोस्त्रिभावाकरी

काश्मीरा त्रिपुरेश्वरी त्रिनयनि विश्वेश्वरी शर्वरी ।

स्वर्गद्वार-कपाट-पाटनकरी काशीपुराधीश्वरी

भिक्षां देहि कृपावलम्बनकरी मातान्नपूर्णेश्वरी

॥ 6 ॥

श्लोक 8

देवी सर्वविचित्र-रत्नरुचिता दाक्षायिणी सुन्दरी

वामा-स्वादुपयोधरा प्रियकरी सौभाग्यमाहेश्वरी ।

भक्ताभीष्टकरी सदा शुभकरी काशीपुराधीश्वरी

भिक्षां देहि कृपावलम्बनकरी मातान्नपूर्णेश्वरी

॥ 7 ॥

श्लोक 9

चन्द्रार्कानल-कोटिकोटि-सदृशी चन्द्रांशु-बिम्बाधरी

चन्द्रार्काग्नि-समान-कुण्डल-धरी चन्द्रार्क-वर्णेश्वरी

माला-पुस्तक-पाशसाङ्कुशधरी काशीपुराधीश्वरी

भिक्षां देहि कृपावलम्बनकरी मातान्नपूर्णेश्वरी

॥ 8 ॥

श्लोक 10

क्षत्रत्राणकरी महाभयकरी माता कृपासागरी

सर्वानन्दकरी सदा शिवकरी विश्वेश्वरी श्रीधरी ।

दक्षाक्रन्दकरी निरामयकरी काशीपुराधीश्वरी

भिक्षां देहि कृपावलम्बनकरी मातान्नपूर्णेश्वरी

॥ 9 ॥

श्लोक 11

अन्नपूर्णे सदापूर्णे शङ्कर-प्राणवल्लभे ।

ज्ञान-वैराग्य-सिद्ध्यर्थं भिक्षां देहि च पार्वती

॥ 10 ॥

श्लोक 12

माता च पार्वतीदेवी पितादेवो महेश्वरः ।

बान्धवा: शिवभक्ताश्च स्वदेशो भुवनत्रयम्

॥ 11 ॥

श्लोक 13

सर्व-मङ्गल-माङ्गल्ये शिवे सर्वार्थ-साधिके ।

शरण्ये त्र्यम्बके गौरि नारायणि नमोऽस्तु ते

॥ 12 ॥

श्लोक 14

इति श्रीमत्परमहंसपरिव्राजकाचार्यस्य श्रीगोविन्दभगवत्पूज्यपादशिष्यस्य श्रीमच्छङ्करभगवतः कृतौ अन्नपूर्णा स्तोत्रम् ।

श्री अन्नपूर्णा स्तोत्रम् | (Sree Annapurna Stotram) Lyrics | Vedic Tithi