Stotram - Sacred Scripture

Rudrashtakam

Rudrashtakam

Stotram
Unknown
9 Verses
110%

रुद्राष्टकम्

श्लोक 1

नमामीशमीशान निर्वाणरूपं

विभुं व्यापकं ब्रह्मवेद-स्वरूपम् ।

निजं निर्गुणं निर्विकल्पं निरीहं

चिदाकाश-माकाशवासं भजेऽहम्

श्लोक 2

निराकारमोङ्कारमूलं तुरीयं

गिराज्ञानगोतीतमीशं गिरीशम् ।

करालं महाकालकालं कृपालुं

गुणागार-संसारपारं नतोऽहम्

॥ 1 ॥

श्लोक 3

तुषाराद्रि-सङ्काशगौरं गभीरं

मनोभूतकोटि-प्रभासी शरीरम् ।

स्फुरन्मौलिकल्लोलिनी चारुगङ्गा

लसद्भाल-बालेन्दु कण्ठे भुजङ्गम्

॥ 2 ॥

श्लोक 4

चलत्कुण्डलं शुभ्रनेत्रं विशालं [भॄसुनेत्रं विशालं]

प्रसन्नाननं नीलकण्ठं दयालुम् ।

मृगाधीश-चर्माम्बरं मुण्डमालं

प्रियं शङ्करं सर्वनाथं भजामि

॥ 3 ॥

श्लोक 5

प्रचण्डं प्रकृष्टं प्रगल्भं परेशं

अखण्डं भजे भानुकोटिप्रकाशम् ।

त्रयी-शूल-निर्मूलनं शूलपाणिं

भजेऽहं भवानीपतिं भावगम्यम्

॥ 4 ॥

श्लोक 6

कलातीत-कल्याण-कल्पान्तकारी

सदा सज्जनानन्द-दाता पुरारी ।

चिदानन्द सन्दोहमोहापहारी

प्रसीद प्रसीद प्रभो मन्मथारी

॥ 5 ॥

श्लोक 7

न यावदुमानाथ-पादारविन्दं

भजन्तीह लोके परे वा नराणाम् ।

न तावत्सुखं शान्ति सन्तापनाशं

प्रसीद प्रभो सर्वभूताधिवासम्

॥ 6 ॥

श्लोक 8

न जानामि योगं जपं नैव पूजां

नतोऽहं सदा सर्वदा देव तुभ्यम् ।

जरा-जन्म-दुःखौघतातप्यमानं

प्रभो पाहि शापान्नमामीश शम्भो

॥ 7 ॥

श्लोक 9

रुद्राष्टकमिदं प्रोक्तं विप्रेण हरतुष्टये ।

ये पठन्ति नरा भक्त्या तेषां शम्भुः प्रसीदति

॥ 8 ॥

श्लोक 10

॥ इति श्रीरामचरितमानसे उत्तरकाण्डे श्रीगोस्वामि तुलसीदासकृतं

श्रीरुद्राष्टकं सम्पूर्णम् ॥

रुद्राष्टकम् | (Rudrashtakam) Lyrics | Vedic Tithi