Ashtakam - Sacred Scripture

Parvati Vallabha Ashtakam

Parvati Vallabha Ashtakam

Ashtakam
Unknown
9 Verses
110%

पार्वती वल्लभ अष्टकम्

श्लोक 1

नमो भूतनाथं नमो देवदेवं

नमः कालकालं नमो दिव्यतेजम् ।

नमः कामभस्मं नमः शान्तशीलं

भजे पार्वतीवल्लभं नीलकण्ठम्

श्लोक 2

सदा तीर्थसिद्धं सदा भक्तरक्षं

सदा शैवपूज्यं सदा शुभ्रभस्मम् ।

सदा ध्यानयुक्तं सदा ज्ञानतल्पं

भजे पार्वतीवल्लभं नीलकण्ठम्

॥ 1 ॥

श्लोक 3

श्मशाने शयानं महास्थानवासं

शरीरं गजानां सदा चर्मवेष्टम् ।

पिशाचादिनाथं पशूनां प्रतिष्ठं

भजे पार्वतीवल्लभं नीलकण्ठम्

॥ 2 ॥

श्लोक 4

फणीनागकण्ठे भुजङ्गाद्यनेकं

गले रुण्डमालं महावीर शूरम् ।

कटिव्याघ्रचर्मं चिताभस्मलेपं

भजे पार्वतीवल्लभं नीलकण्ठम्

॥ 3 ॥

श्लोक 5

शिरः शुद्धगङ्गा शिवा वामभागं

वियद्दीर्घकेशं सदा मां त्रिणेत्रम् ।

फणीनागकर्णं सदा फालचन्द्रं

भजे पार्वतीवल्लभं नीलकण्ठम्

॥ 4 ॥

श्लोक 6

करे शूलधारं महाकष्टनाशं

सुरेशं परेशं महेशं जनेशम् ।

धनेशामरेशं ध्वजेशं गिरीशं [धनेशस्यमित्रं]

भजे पार्वतीवल्लभं नीलकण्ठम्

॥ 5 ॥

श्लोक 7

उदासं सुदासं सुकैलासवासं

धरानिर्झरे संस्थितं ह्यादिदेवम् ।

अजं हेमकल्पद्रुमं कल्पसेव्यं

भजे पार्वतीवल्लभं नीलकण्ठम्

॥ 6 ॥

श्लोक 8

मुनीनां वरेण्यं गुणं रूपवर्णं

द्विजैः सम्पठन्तं शिवं वेदशास्त्रम् ।

अहो दीनवत्सं कृपालुं शिवं तं

भजे पार्वतीवल्लभं नीलकण्ठम्

॥ 7 ॥

श्लोक 9

सदा भावनाथं सदा सेव्यमानं

सदा भक्तिदेवं सदा पूज्यमानम् ।

महातीर्थवासं सदा सेव्यमेकं

भजे पार्वतीवल्लभं नीलकण्ठम्

॥ 8 ॥

श्लोक 10

इति श्रीमच्छङ्करयोगीन्द्र विरचितं पार्वतीवल्लभाष्टकं नाम नीलकण्ठ स्तवः ॥