Stotram - Sacred Scripture

Manidweepa Varnanam (Telugu)

Manidweepa Varnanam (Telugu)

Stotram
Unknown
32 Verses
110%

मणिद्वीप वर्णनम् (तॆलुगु)

श्लोक 1

महाशक्ति मणिद्वीप निवासिनी

मुल्लोकालकु मूलप्रकाशिनी ।

मणिद्वीपमुलो मन्त्ररूपिणी

मन मनसुललो कॊलुवैयुन्दि

श्लोक 2

सुगन्ध पुष्पालॆन्नो वेलु

अनन्त सुन्दर सुवर्ण पूलु ।

अचञ्चलम्बगु मनो सुखालु

मणिद्वीपानिकि महानिधुलु

॥ 1 ॥

श्लोक 3

लक्षल लक्षल लावण्यालु

अक्षर लक्षल वाक्सम्पदलु ।

लक्षल लक्षल लक्ष्मीपतुलु

मणिद्वीपानिकि महानिधुलु

॥ 2 ॥

श्लोक 4

पारिजातवन सौगन्धालु

सूराधिनाधुल सत्सङ्गालु ।

गन्धर्वादुल गानस्वरालु

मणिद्वीपानिकि महानिधुलु

॥ 3 ॥

श्लोक 5

भुवनेश्वरि सङ्कल्पमे जनियिञ्चे मणिद्वीपमु ।

देवदेवुल निवासमु अदिये मनकु कैवल्यमु ॥

पद्मरागमुलु सुवर्णमणुलु

पदि आमडल पॊडवुन गलवु ।

मधुर मधुरमगु चन्दनसुधलु

मणिद्वीपानिकि महानिधुलु

॥ 4 ॥

श्लोक 6

अरुवदि नालुगु कलामतल्लुलु

वरालनॊसगे पदारु शक्तुलु ।

परिवारमुतो पञ्चब्रह्मलु

मणिद्वीपानिकि महानिधुलु

॥ 5 ॥

श्लोक 7

अष्टसिद्धुलु नवनवनिधुलु

अष्टदिक्कुलु दिक्पालकुलु ।

सृष्टिकर्तलु सुरलोकालु

मणिद्वीपानिकि महानिधुलु

॥ 6 ॥

श्लोक 8

कोटिसूर्युल प्रचण्ड कान्तुलु

कोटिचन्द्रुल चल्लनि वॆलुगुलु ।

कोटितारकल वॆलुगु जिलुगुलु

मणिद्वीपानिकि महानिधुलु

॥ 7 ॥

श्लोक 9

भुवनेश्वरि सङ्कल्पमे जनियिञ्चे मणिद्वीपमु ।

देवदेवुल निवासमु अदिये मनकु कैवल्यमु ॥

कञ्चु गोडल प्राकारालु

रागि गोडल चतुरस्रालु ।

एडामडल रत्नराशुलु

मणिद्वीपानिकि महानिधुलु

॥ 8 ॥

श्लोक 10

पञ्चामृतमय सरोवरालु

पञ्चलोहमय प्राकारालु ।

प्रपञ्चमेले प्रजाधिपतुलु

मणिद्वीपानिकि महानिधुलु

॥ 9 ॥

श्लोक 11

इन्द्रनीलमणि आभरणालु

वज्रपुकोटलु वैढूर्यालु ।

पुष्यरागमणि प्राकारालु

मणिद्वीपानिकि महानिधुलु

॥ 10 ॥

श्लोक 12

सप्तकोटिघन मन्त्रविद्यलु

सर्वशुभप्रद इच्छाशक्तुलु ।

श्री गायत्री ज्ञानशक्तुलु

मणिद्वीपानिकि महानिधुलु

॥ 11 ॥

श्लोक 13

भुवनेश्वरि सङ्कल्पमे जनियिञ्चे मणिद्वीपमु ।

देवदेवुल निवासमु अदिये मनकु कैवल्यमु ॥

मिलमिललाडे मुत्यपु राशुलु

तलतललाडे चन्द्रकान्तमुलु ।

विद्युल्लतलु मरकतमणुलु

मणिद्वीपानिकि महानिधुलु

॥ 12 ॥

श्लोक 14

कुबेर इन्द्र वरुण देवुलु

शुभाल नॊसगे अग्निवायुवुलु ।

भूमि गणपति परिवारमुलु

मणिद्वीपानिकि महानिधुलु

॥ 13 ॥

श्लोक 15

भक्ति ज्ञान वैराग्य सिद्धुलु

पञ्चभूतमुलु पञ्चशक्तुलु ।

सप्तृषुलु नवग्रहालु

मणिद्वीपानिकि महानिधुलु

॥ 14 ॥

श्लोक 16

कस्तूरि मल्लिक कुन्दवनालु

सूर्यकान्ति शिल महाग्रहालु ।

आरु ऋतुवुलु चतुर्वेदालु

मणिद्वीपानिकि महानिधुलु

॥ 15 ॥

श्लोक 17

भुवनेश्वरि सङ्कल्पमे जनियिञ्चे मणिद्वीपमु ।

देवदेवुल निवासमु अदिये मनकु कैवल्यमु ॥

मन्त्रिणि दण्डिनि शक्तिसेनलु

कालि कराली सेनापतुलु ।

मुप्पदिरॆण्डु महाशक्तुलु

मणिद्वीपानिकि महानिधुलु

॥ 16 ॥

श्लोक 18

सुवर्ण रजित सुन्दरगिरुलु

अनङ्गदेवि परिचारिकलु ।

गोमेधिकमणि निर्मितगुहलु

मणिद्वीपानिकि महानिधुलु

॥ 17 ॥

श्लोक 19

सप्तसमुद्रमुलनन्त निधुलु

यक्ष किन्नॆर किम्पुरुषादुलु ।

नानाजगमुलु नदीनदमुलु

मणिद्वीपानिकि महानिधुलु

॥ 18 ॥

श्लोक 20

मानव माधव देवगणमुलु

कामधेनुवु कल्पतरुवुलु ।

सृष्टि स्थिति लय कारणमूर्तुलु

मणिद्वीपानिकि महानिधुलु

॥ 19 ॥

श्लोक 21

भुवनेश्वरि सङ्कल्पमे जनियिञ्चे मणिद्वीपमु ।

देवदेवुल निवासमु अदिये मनकु कैवल्यमु ॥

कोटि प्रकृतुल सौन्दर्यालु

सकल वेदमुलु उपनिषत्तुलु ।

पदारुरेकुल पद्मशक्तुलु

मणिद्वीपानिकि महानिधुलु

॥ 20 ॥

श्लोक 22

दिव्यफलमुलु दिव्यास्त्रमुलु

दिव्यपुरुषुलु धीरमातलु ।

दिव्यजगमुलु दिव्यशक्तुलु

मणिद्वीपानिकि महानिधुलु

॥ 21 ॥

श्लोक 23

श्री विघ्नेश्वर कुमारस्वामुलु

ज्ञानमुक्ति एकान्त भवनमुलु ।

मणिनिर्मितमगु मण्डपालु

मणिद्वीपानिकि महानिधुलु

॥ 22 ॥

श्लोक 24

पञ्चभूतमुलु याजमान्यालु

प्रवालसालं अनेक शक्तुलु ।

सन्तानवृक्ष समुदायालु

मणिद्वीपानिकि महानिधुलु

॥ 23 ॥

श्लोक 25

भुवनेश्वरि सङ्कल्पमे जनियिञ्चे मणिद्वीपमु ।

देवदेवुल निवासमु अदिये मनकु कैवल्यमु ॥

चिन्तामणुलु नवरत्नालु

नूरामडल वज्रपुराशुलु ।

वसन्तवनमुलु गरुडपच्चलु

मणिद्वीपानिकि महानिधुलु

॥ 24 ॥

श्लोक 26

दुःखमु तॆलियनि देवीसेनलु

नटनाट्यालु सङ्गीतालु ।

धनकनकालु पुरुषार्धालु

मणिद्वीपानिकि महानिधुलु

॥ 25 ॥

श्लोक 27

पदुनालुगु लोकालन्निटि पैन

सर्वलोकमनु लोकमु कलदु ।

सर्वलोकमे ई मणिद्वीपमु

सर्वेश्वरिकदि शाश्वत स्थानम्

॥ 26 ॥

श्लोक 28

चिन्तामणुल मन्दिरमन्दु

पञ्चब्रह्मल मञ्चमुपैन ।

महादेवुडु भुवनेश्वरितो

निवसिस्ताडु मणिद्वीपमुलो

॥ 27 ॥

श्लोक 29

भुवनेश्वरि सङ्कल्पमे जनियिञ्चे मणिद्वीपमु ।

देवदेवुल निवासमु अदिये मनकु कैवल्यमु ॥

मणिगणखचित आभरणालु

चिन्तामणि परमेश्वरिदाल्चि ।

सौन्दर्यानिकि सौन्दर्यमुगा

अगुपडुतुन्दि मणिद्वीपमुलो

॥ 28 ॥

श्लोक 30

परदेवतनु नित्यमुकॊलचि

मनसर्पिञ्चि अर्चिञ्चिनचो ।

अपारधनमु सम्पदलिच्चि

मणिद्वीपेश्वरि दीविस्तुन्दि

॥ 29 ॥

श्लोक 31

नूतन गृहमुलु कट्टिनवारु

मणिद्वीपवर्णन तॊम्मिदिसार्लु ।

चदिविन चालु अन्ता शुभमे

अष्टसम्पदल तुलतूगेरु

॥ 30 ॥

श्लोक 32

शिवकवितेश्वरि श्रीचक्रेश्वरि

मणिद्वीप वर्णन चदिविन चोट ।

तिष्टवेसुकुनि कूर्चॊनुनण्ट

कोटिशुभालनु समकूर्चुटकै

॥ 31 ॥

श्लोक 33

भुवनेश्वरि सङ्कल्पमे जनियिञ्चे मणिद्वीपमु ।

देवदेवुल निवासमु अदिये मनकु कैवल्यमु ॥