Stotram - Sacred Scripture

Lingashtakam

Lingashtakam

Stotram
Unknown
8 Verses
110%

लिङ्गाष्टकम्

श्लोक 1

ब्रह्ममुरारि सुरार्चित लिङ्गं

निर्मलभासित शोभित लिङ्गम् ।

जन्मज दुःख विनाशक लिङ्गं [विनाशन]

तत्प्रणमामि सदाशिव लिङ्गम्

श्लोक 2

देवमुनि प्रवरार्चित लिङ्गं

कामदहन करुणाकर लिङ्गम् ।

रावण दर्प विनाशन लिङ्गं

तत्प्रणमामि सदाशिव लिङ्गम्

॥ 1 ॥

श्लोक 3

सर्व सुगन्ध सुलेपित लिङ्गं

बुद्धि विवर्धन कारण लिङ्गम् ।

सिद्ध सुरासुर वन्दित लिङ्गं

तत्प्रणमामि सदाशिव लिङ्गम्

॥ 2 ॥

श्लोक 4

कनक महामणि भूषित लिङ्गं

फणिपति वेष्टित शोभित लिङ्गम् ।

दक्षसुयज्ञ विनाशन लिङ्गं

तत्प्रणमामि सदाशिव लिङ्गम्

॥ 3 ॥

श्लोक 5

कुङ्कुम चन्दन लेपित लिङ्गं

पङ्कज हार सुशोभित लिङ्गम् ।

सञ्चित पाप विनाशन लिङ्गं

तत्प्रणमामि सदाशिव लिङ्गम्

॥ 4 ॥

श्लोक 6

देवगणार्चित सेवित लिङ्गं

भावै-र्भक्तिभिरेव च लिङ्गम् ।

दिनकर कोटि प्रभाकर लिङ्गं

तत्प्रणमामि सदाशिव लिङ्गम्

॥ 5 ॥

श्लोक 7

अष्टदलोपरिवेष्टित लिङ्गं

सर्वसमुद्भव कारण लिङ्गम् ।

अष्टदरिद्र विनाशन लिङ्गं

तत्प्रणमामि सदाशिव लिङ्गम्

॥ 6 ॥

श्लोक 8

सुरगुरु सुरवर पूजित लिङ्गं

सुरवन पुष्प सदार्चित लिङ्गम् ।

परात्परं (परमपदं) परमात्मक लिङ्गं

तत्प्रणमामि सदाशिव लिङ्गम्

॥ 7 ॥

श्लोक 9

लिङ्गाष्टकमिदं पुण्यं यः पठेश्शिव सन्निधौ ।

शिवलोकमवाप्नोति शिवेन सह मोदते ॥

लिङ्गाष्टकम् | (Lingashtakam) Lyrics | Vedic Tithi