Stotram - Sacred Scripture

Kasi Vishwanathashtakam

Kasi Vishwanathashtakam

Stotram
Unknown
8 Verses
110%

काशी विश्वनाथाष्टकम्

श्लोक 1

गङ्गा तरङ्ग रमणीय जटा कलापं

गौरी निरन्तर विभूषित वाम भागं

नारायण प्रियमनङ्ग मदापहारं

वाराणशी पुरपतिं भज विश्वनाथम्

श्लोक 2

वाचामगोचरमनेक गुण स्वरूपं

वागीश विष्णु सुर सेवित पाद पद्मं

वामेण विग्रह वरेन कलत्रवन्तं

वाराणशी पुरपतिं भज विश्वनाथम्

॥ 1 ॥

श्लोक 3

भूतादिपं भुजग भूषण भूषिताङ्गं

व्याघ्राञ्जिनां बरधरं, जटिलं, त्रिनेत्रं

पाशाङ्कुशाभय वरप्रद शूलपाणिं

वाराणशी पुरपतिं भज विश्वनाथम्

॥ 2 ॥

श्लोक 4

सीतांशु शोभित किरीट विराजमानं

बालेक्षणातल विशोषित पञ्चबाणं

नागाधिपा रचित बासुर कर्ण पूरं

वाराणशी पुरपतिं भज विश्वनाथम्

॥ 3 ॥

श्लोक 5

पञ्चाननं दुरित मत्त मतङ्गजानां

नागान्तकं धनुज पुङ्गव पन्नागानां

दावानलं मरण शोक जराटवीनां

वाराणशी पुरपतिं भज विश्वनाथम्

॥ 4 ॥

श्लोक 6

तेजोमयं सगुण निर्गुणमद्वितीयं

आनन्द कन्दमपराजित मप्रमेयं

नागात्मकं सकल निष्कलमात्म रूपं

वाराणशी पुरपतिं भज विश्वनाथम्

॥ 5 ॥

श्लोक 7

आशां विहाय परिहृत्य परश्य निन्दां

पापे रथिं च सुनिवार्य मनस्समाधौ

आधाय हृत्-कमल मध्य गतं परेशं

वाराणशी पुरपतिं भज विश्वनाथम्

॥ 6 ॥

श्लोक 8

रागाधि दोष रहितं स्वजनानुरागं

वैराग्य शान्ति निलयं गिरिजा सहायं

माधुर्य धैर्य सुभगं गरलाभिरामं

वाराणशी पुरपतिं भज विश्वनाथम्

॥ 7 ॥

श्लोक 9

वाराणशी पुर पते स्थवनं शिवस्य

व्याख्यातं अष्टकमिदं पठते मनुष्य

विद्यां श्रियं विपुल सौख्यमनन्त कीर्तिं

सम्प्राप्य देव निलये लभते च मोक्षम् ॥

विश्वनाथाष्टकमिदं पुण्यं यः पठेः शिव सन्निधौ

शिवलोकमवाप्नोति शिवेनसह मोदते ॥

काशी विश्वनाथाष्टकम् | (Kasi Vishwanathashtakam) Lyrics | Vedic Tithi