Stotram - Sacred Scripture

Kalabhairava Ashtakam

Kalabhairava Ashtakam

Stotram
Kala Bhairava
8 Verses
110%

कालभैरवाष्टकम्

श्लोक 1

देवराज-सेव्यमान-पावनाङ्घ्रि-पङ्कजं

व्यालयज्ञ-सूत्रमिन्दु-शेखरं कृपाकरम् ।

नारदादि-योगिबृन्द-वन्दितं दिगम्बरं

काशिकापुराधिनाथ कालभैरवं भजे

श्लोक 2

भानुकोटि-भास्वरं भवब्धितारकं परं

नीलकण्ठ-मीप्सितार्थ-दायकं त्रिलोचनम् ।

कालकाल-मम्बुजाक्ष-मक्षशूल-मक्षरं

काशिकापुराधिनाथ कालभैरवं भजे

॥ 1 ॥

श्लोक 3

शूलटङ्क-पाशदण्ड-पाणिमादि-कारणं

श्यामकाय-मादिदेव-मक्षरं निरामयम् ।

भीमविक्रमं प्रभुं विचित्र ताण्डव प्रियं

काशिकापुराधिनाथ कालभैरवं भजे

॥ 2 ॥

श्लोक 4

भुक्ति-मुक्ति-दायकं प्रशस्तचारु-विग्रहं

भक्तवत्सलं स्थिरं समस्तलोक-विग्रहम् । [स्थितं]

निक्वणन्-मनोज्ञ-हेम-किङ्किणी-लसत्कटिं [विनिक्वणन्]

काशिकापुराधिनाथ कालभैरवं भजे

॥ 3 ॥

श्लोक 5

धर्मसेतु-पालकं त्वधर्ममार्ग नाशकं [नाशनं]

कर्मपाश-मोचकं सुशर्म-दायकं विभुम् ।

स्वर्णवर्ण-केशपाश-शोभिताङ्ग-मण्डलं [शॆषपाश, निर्मलं]

काशिकापुराधिनाथ कालभैरवं भजे

॥ 4 ॥

श्लोक 6

रत्न-पादुका-प्रभाभिराम-पादयुग्मकं

नित्य-मद्वितीय-मिष्ट-दैवतं निरञ्जनम् ।

मृत्युदर्प-नाशनं करालदंष्ट्र-मोक्षदं [भूषणं]

काशिकापुराधिनाथ कालभैरवं भजे

॥ 5 ॥

श्लोक 7

अट्टहास-भिन्न-पद्मजाण्डकोश-सन्ततिं

दृष्टिपात-नष्टपाप-जालमुग्र-शासनम् ।

अष्टसिद्धि-दायकं कपालमालिका-धरं

काशिकापुराधिनाथ कालभैरवं भजे

॥ 6 ॥

श्लोक 8

भूतसङ्घ-नायकं विशालकीर्ति-दायकं

काशिवासि-लोक-पुण्यपाप-शोधकं विभुम् । [कशिवास]

नीतिमार्ग-कोविदं पुरातनं जगत्पतिं

काशिकापुराधिनाथ कालभैरवं भजे

॥ 7 ॥

श्लोक 9

कालभैरवाष्टकं पठन्ति ये मनोहरं

ज्ञानमुक्ति-साधकं विचित्र-पुण्य-वर्धनम् ।

शोकमोह-लोभदैन्य-कोपताप-नाशनं [दैन्यलोभ]

ते प्रयान्ति कालभैरवाङ्घ्रि-सन्निधिं ध्रुवम् ॥

इति श्रीमत्परमहंसपरिव्राजकाचर्यस्य

श्रीगोविन्दभगवत्पूज्यपादशिष्यस्य

श्रीमच्छङ्करभगवतः कृतौ

श्री कालभैरवाष्टकं सम्पूर्णम् ।