Stotram - Sacred Scripture

Dasarathi Satakam

Dasarathi Satakam

Stotram
Unknown
104 Verses
110%

दाशरथी शतकम्

श्लोक 1

श्री रघुराम चारुतुल-सीतादलधाम शमक्षमादि शृं

गार गुणाभिराम त्रिज-गन्नुत शौर्य रमाललाम दु

र्वार कबन्धराक्षस वि-राम जगज्जन कल्मषार्नवो

त्तारकनाम! भद्रगिरि-दाशरथी करुणापयोनिधी.

श्लोक 2

रामविशाल विक्रम पराजित भार्गवराम सद्गुण

स्तोम पराङ्गनाविमुख सुव्रत काम विनील नीरद

श्याम ककुत्ध्सवंश कलशाम्भुधिसोम सुरारिदोर्भलो

द्धाम विराम भद्रगिरि - दाशरथी करुणापयोनिधी.

॥ 1 ॥

श्लोक 3

अगणित सत्यभाष, शरणागतपोष, दयालसज्घरी

विगत समस्तदोष, पृथिवीसुरतोष, त्रिलोक पूतकृ

द्गग नधुनीमरन्द पदकञ्ज विशेष मणिप्रभा धग

द्धगित विभूष भद्रगिरि दाशरथी करुणापयोनिधी.

॥ 2 ॥

श्लोक 4

रङ्गदरातिभङ्ग, खग राजतुरङ्ग, विपत्परम्परो

त्तुङ्ग तमःपतङ्ग, परि तोषितरङ्ग, दयान्तरङ्ग स

त्सङ्ग धरात्मजा हृदय सारसभृङ्ग निशाचराब्जमा

तङ्ग, शुभाङ्ग, भद्रगिरि दाशरथी करुणापयोनिथी.

॥ 3 ॥

श्लोक 5

श्रीद सनन्दनादि मुनिसेवित पाद दिगन्तकीर्तिसं

पाद समस्तभूत परिपाल विनोद विषाद वल्लि का

च्छेद धराधिनाथकुल सिन्धुसुधामयपाद नृत्तगी

तादि विनोद भद्रगिरि दाशरथी करुणापयोनिधी.

॥ 4 ॥

श्लोक 6

आर्युल कॆल्ल म्रॊक्किविन ताङ्गुडनै रघुनाध भट्टरा

रार्युल कञ्जलॆत्ति कवि सत्तमुलन् विनुतिञ्चि कार्य सौ

कर्य मॆलर्पनॊक्क शतकम्बॊन गूर्चि रचिन्तुनेडुता

त्पर्यमुनन् ग्रहिम्पुमिदि दाशरथी करुणापयोनिधी.

॥ 5 ॥

श्लोक 7

मसकॊनि रेङ्गुबण्ड्लुकुनु मौक्तिकमुल् वॆलवोसिनट्लुदु

र्व्यसनमुजॆन्दि काव्यमु दुरात्मुलकिच्चितिमोस मय्यॆ ना

रसनकुँ बूतवृत्तिसुक रम्बुग जेकुरुनट्लु वाक्सुधा

रसमुलुचिल्क बद्युमुख रङ्गमुनन्दुनटिम्प वय्यसं

तसमु जॆन्दि भद्रगिरि दाशरथी करुणापयोनिधी.

॥ 6 ॥

श्लोक 8

श्रीरमणीयहार यतसी कुसुमाभशरीर, भक्त मं

दार, विकारदूर, परतत्त्वविहार त्रिलोक चेतनो

दार, दुरन्त पातक वितान विदूर, खरादि दैत्यकां

तार कुठार भद्रगिरि दाशरथी करुणापयोनिधी.

॥ 7 ॥

श्लोक 9

दुरितलतालवित्र, खर दूषणकाननवीतिहॊत्र, भू

भरणकलाविचित्र, भव बन्धविमोचनसूत्र, चारुवि

स्फुरदरविन्दनेत्र, घन पुण्यचरित्र, विनीलभूरिकं

धरसमगात्र, भद्रगिरि दाशरथी करुणापयोनिधी.

॥ 8 ॥

श्लोक 10

कनकविशालचेल भवकानन शातकुठारधार स

ज्जनपरिपालशील दिविजस्तुत सद्गुण काण्डकाण्ड सं

जनित पराक्रमक्रम विशारद शारद कन्दकुन्द चं

दन घनसार सारयश दाशरथी करुणापयोनिधी.

॥ 9 ॥

श्लोक 11

श्री रघुवंश तोयधिकि शीतमयूखुडवैन नी पवि

त्रोरुपदाब्जमुल् विकसितोत्पल चम्पक वृत्तमाधुरी

पूरितवाक्प्रसूनमुल बूजलॊनर्चॆद जित्तगिम्पुमी

तारकनाम भद्रगिरि दाशरथी करुणापयोनिधी.

॥ 10 ॥

श्लोक 12

गुरुतरमैन काव्यरस गुम्भनकब्बुर मन्दिमुष्करुल्

सरसुलमाड्कि सन्तसिल जूलुदुरोटुशशाङ्क चन्द्रिकां

कुरमुल किन्दु कान्तमणि कोटिस्रविञ्चिन भङ्गिविन्ध्यभू

धरमुन जाऱुने शिललु दाशरथी करुणापयोनिधी.

॥ 11 ॥

श्लोक 13

तरणिकुलेश नानुडुल दप्पुलु गल्गिन नीदुनाम स

द्विरचितमैन काव्यमु पवित्रमुगादॆ वियन्नदीजलं

बरगुचुवङ्कयैन मलिनाकृति बाऱिन दन्महत्वमुं

दरमॆ गणिम्प नॆव्वरिकि दाशरथी करुणापयोनिधी.

॥ 12 ॥

श्लोक 14

दारुणपात काब्धिकि सदा बडबाग्नि भवाकुलार्तिवि

स्तारदवानलार्चिकि सुधारसवृष्टि दुरन्त दुर्मता

चारभयङ्क राटविकि जण्डकठोरकुठारधार नी

तारकनाम मॆन्नुकॊन दाशरथी करुणापयोनिधी.

॥ 13 ॥

श्लोक 15

हरुनकु नव्विभीषणुनक द्रिजकुं दिरुमन्त्र राजमै

करिकि सहल्यकुं द्रुपदकन्यकु नार्तिहरिञ्चुचुट्टमै

परगिनयट्टि नीपतित पावननाममु जिह्वपै निरं

तरमु नटिम्पजेयुमिक दाशरथी करुणापयोनिधी.

॥ 14 ॥

श्लोक 16

मुप्पुन गालकिङ्करुलु मुङ्गिटवच्चिन वेल, रोगमुल्

गॊप्परमैनचो गफमु कुत्तुक निण्डिनवेल, बान्धवुल्

गप्पिनवेल, मीस्मरण गल्गुनॊ गल्गदॊ नाटि किप्पुडे

तप्पकचेतु मीभजन दाशरथी करुणापयोनिधी.

॥ 15 ॥

श्लोक 17

परमदयानिधे पतितपावननाम हरे यटञ्चु सु

स्धिरमतुलै सदाभजन सेयु महात्मुल पादधूलि ना

शिरमुनदाल्तुमीरटकु जेरकुडञ्चु यमुण्डु किङ्करो

त्करमुल कान बॆट्टुनट दाशरथी करुणापयोनिधी.

॥ 16 ॥

श्लोक 18

अजुनकु तण्ड्रिवय्यु सनकादुलकुं बरतत्त्वमय्युस

द्द्विजमुनिकोटिकॆल्लबर देतवय्यु दिनेशवंश भू

भुजुलकु मेटिवय्युबरि पूर्णुडवै वॆलिगॊन्दुपक्षिरा

ड्ध्वजमिमु ब्रस्तुतिञ्चॆदनु दाशरथी करुणापयोनिधी.

॥ 17 ॥

श्लोक 19

पण्डित रक्षकुं डखिल पापविमॊचनु डब्जसम्भवा

खण्डल पूजितुण्डु दशकण्ठ विलुण्ठन चण्डकाण्डको

दण्डकला प्रवीणुडवु तावक कीर्ति वधूटि कित्तुपू

दण्डलु गाग ना कवित दाशरथी करुणापयोनिधी.

॥ 18 ॥

श्लोक 20

श्रीरम सीतगाग निजसेवक बृन्दमु वीरवैष्णवा

चार जवम्बुगाग विरजानदि गौतमिगा विकुण्ठ मु

न्नारयभद्र शैलशिखराग्रमुगाग वसिञ्चु चेतनो

द्धारकुडैन विष्णुडवु दाशरथी करुणापयोनिधी.

॥ 19 ॥

श्लोक 21

कण्टि नदीतटम्बुबॊडगण्टिनि भद्रनगाधिवासमुन्

गण्टि निलातनूजनुरु कार्मुक मार्गणशङ्खचक्रमुल्

गण्टिनि मिम्मु लक्ष्मणुनि गण्टि कृतार्धुड नैति नो जग

त्कण्टक दैत्यनिर्धलन दाशरथी करुणापयोनिधी.

॥ 20 ॥

श्लोक 22

हलिकुनकुन् हलाग्रमुन नर्धमु सेकुरुभङ्गि दप्पिचे

नलमट जॆन्दुवानिकि सुरापगलो जल मब्बिनट्लु दु

र्मलिन मनोविकारियगु मर्त्युनि नन्नॊडगूर्चि नीपयिन्

दलवु घटिम्पजेसितिवॆ दाशरथी करुणापयोनिधी.

॥ 21 ॥

श्लोक 23

कॊञ्जकतर्क वादमनु गुद्दलिचे बरतत्त्वभूस्धलिन्

रञ्जिलद्रव्वि कङ्गॊननि रामनिधानमु नेडु भक्तिसि

द्धाञ्जनमन्दुहस्तगत मय्यॆबली यनगा मदीयहृ

त्कञ्जमुनन् वसिम्पुमिक दाशरथी करुणापयोनिधी.

॥ 22 ॥

श्लोक 24

रामुँडु घोर पातक विरामुडु सद्गुणकल्पवल्लिका

रामुडु षड्विकारजय रामुडु साधुजनावनव्रतो

द्दामुँडु रामुडे परम दैवमु माकनि मी यडुङ्गु गॆं

दामरले भुजिञ्चॆदनु दाशरथी करुणापयोनिधी.

॥ 23 ॥

श्लोक 25

चक्कॆरमानिवेमुदिन जालिनकैवडि मानवाधमुल्

पॆक्कुरु ऒक्क दैवमुल वेमऱुगॊल्चॆदरट्ल कादया

म्रॊक्किननीकु म्रॊक्कवलॆ मोक्ष मॊसङ्गिन नीवयीवलॆं

दक्किनमाट लेमिटिकि दाशरथी करुणापयोनिधी.

॥ 24 ॥

श्लोक 26

'रा' कलुषम्बुलॆल्ल बयलम्बडद्रोचिन 'मा'क वाटमै

डीकॊनिप्रोवुचुनिक्क मनिधीयुतुलॆन्नँददीय वर्णमुल्

गैकॊनि भक्ति चे नुडुवँगानरु गाक विपत्परम्परल्

दाकॊनुने जगज्जनुल दाशरथी करुणापयोनिधी.

॥ 25 ॥

श्लोक 27

रामहरे ककुत्ध्सकुल रामहरे रघुरामरामश्री

रामहरेयटञ्चु मदि रञ्जिल भेकगलम्बुलील नी

नाममु संस्मरिञ्चिन जनम्बु भवम्बॆडबासि तत्परं

धाम निवासुलौदुरट दाशरथी करुणापयोनिधी.

॥ 26 ॥

श्लोक 28

चक्कॆर लप्पकुन् मिगुल जव्वनि कॆञ्जिगुराकु मोविकिं

जॊक्कपुजुण्टि तेनियकु जॊक्कुलुचुङ्गन लेरु गाक ने

डक्कट रामनाममधु रामृतमानुटकण्टॆ सौख्यामा

तक्किनमाधुरी महिम दाशरथी करुणापयोनिधी.

॥ 27 ॥

श्लोक 29

अण्डजवाह निन्नु हृदयम्बुननम्मिन वारि पापमुल्

कॊण्डलवण्टिवैन वॆसगूलि नशिम्पक युन्नॆ सन्त ता

खण्डलवैभवोन्नतुलु गल्गकमानुनॆ मोक्ष लक्ष्मिकै

दण्डयॊसङ्गकुन्नॆ तुद दाशरथी करुणापयोनिधी.

॥ 28 ॥

श्लोक 30

चिक्कनिपालपै मिसिमि जॆन्दिन मीगड पञ्चदारतो

मॆक्किनभङ्गि मीविमल मेचकरूप सुधारसम्बु ना

मक्कुव पल्लेरम्बुन समाहित दास्यमु नेटिदो यिटन्

दक्कॆनटञ्चु जुर्रॆदनु दाशरथी करुणापयोनिधी.

॥ 29 ॥

श्लोक 31

सिरुलिडसीत पीडलॆग जिम्मुटकुन् हनुमन्तुडार्तिसो

दरुडु सुमित्रसूति दुरितम्बुलुमानुप राम नाममुं

गरुणदलिर्प मानवुलगावग बन्निन वज्रपञ्जरो

त्करमुगदा भवन्महिम दाशरथी करुणापयोनिधी.

॥ 30 ॥

श्लोक 32

हलिकुलिशाङ्कुशध्वज शरासन शङ्खरथाङ्ग कल्पको

ज्वलजलजात रेखलनु सांशमुलै कनुपट्टुचुन्न मी

कलितपदाम्बुज द्वयमु गौतमपत्नि कॊसङ्गिनट्लु ना

तलपुन जेर्चिकावगदॆ दाशरथी करुणापयोनिधी.

॥ 31 ॥

श्लोक 33

जलनिधिलोनदूऱि कुल शैलमुमीटि धरित्रिगॊम्मुनं

दलवडमाटिरक्कसुनि यङ्गमुगीटिबलीन्द्रुनिन् रसा

तलमुनमाटि पार्धिवक दम्बमुगूऱ्चिन मेटिराम ना

तलपुननाटि रागदवॆ दाशरथी करुणापयोनिधी.

॥ 32 ॥

श्लोक 34

भण्डन भीमुडा र्तजन बान्धवुडुज्ज्वल बाणतूणको

दण्डकलाप्रचण्ड भुज ताण्डवकीर्तिकि राममूर्तिकिन्

रॆण्डव साटिदैवमिक लेडनुचुन् गडगट्टि भेरिका

डाण्ड डडाण्ड डाण्ड निनदम्बु लजाण्डमुनिण्ड मत्तवे

दण्डमु नॆक्कि चाटॆदनु दाशरथी करुणापयोनिधी.

॥ 33 ॥

श्लोक 35

अवनिज कन्नुदोयि तॊगलन्दु वॆलिङ्गॆडु सोम, जानकी

कुवलयनेत्र गब्बिचनुकॊण्डल नुण्डु घनम्ब मैधिली

नवनव यौवनम्बनु वनम्बुकुन् मददन्ति वीवॆका

दविलि भजिन्तु नॆल्लपुडु दाशरथी करुणापयोनिधी.

॥ 34 ॥

श्लोक 36

खरकरवंशजा विनु मुखण्डित भूतपिशाचढाकिनी

ज्वर परितापसर्पभय वारकमैन भवत्पदाब्ज नि

स्पुर दुरुवज्रपञ्जरमुजॊच्चिति, नीयॆड दीन मानवो

ध्धर बिरुदङ्क मेमऱुकु दाशरथी करुणापयोनिधी.

॥ 35 ॥

श्लोक 37

जुर्रॆदमीक थामृतमु जुर्रॆदमीपदकञ्जतो यमुन्

जुर्रॆद रामनाममुन जॊब्बिलुचुन्न सुधारसम्ब ने

जुर्रॆद जुर्रुजुर्रुँग रुचुल् गनुवारिपदम्बु गूर्पवे

तुर्रुलतोडि पॊत्तिडक दाशरथी करुणापयोनिधी.

॥ 36 ॥

श्लोक 38

घोरकृतान्त वीरभट कोटिकि गुण्डॆदिगुल् दरिद्रता

कारपिशाच संहरण कार्यविनोदि विकुण्ठ मन्दिर

द्वार कवाट भेदि निजदास जनावलिकॆल्ल प्रॊद्दु नी

तारकनाम मॆन्नुकॊन दाशरथी करुणापयोनिधी.

॥ 37 ॥

श्लोक 39

विन्नपमालकिञ्चु रघुवीर नहिप्रतिलोकमन्दु ना

कन्नदुरात्मुडुं बरम कारुणिकोत्तम वेल्पुलन्दु नी

कन्न महात्मुडुं बतित कल्मषदूरुडु लेडुनाकुवि

द्वन्नुत नीवॆनाकु गति दाशरथी करुणापयोनिधी.

॥ 38 ॥

श्लोक 40

पॆम्पुनँदल्लिवै कलुष बृन्दसमागम मॊन्दुकुण्डु र

क्षिम्पनुदण्ड्रिवै मॆयु वसिञ्चुदु शेन्द्रिय रोगमुल् निवा

रिम्पनु वॆज्जवै कृप गुऱिञ्चि परम्बु दिरबुगाँग स

त्सम्पदलीय नीवॆगति दाशरथी करुणापयोनिधी.

॥ 39 ॥

श्लोक 41

कुक्षिनजाण्डपं क्तुलॊन गूर्चि चराचरजन्तुकोटि सं

रक्षणसेयु तण्ड्रिवि परम्पर नी तनयुण्डनैन ना

पक्षमु नीवुगावलदॆ पापमु लॆन्नि यॊनर्चिनन् जग

द्रक्षक कर्तवीवॆकद दाशरथी करुणापयोनिधी.

॥ 40 ॥

श्लोक 42

गद्दरियो गिहृत्कमल गन्धर सानुभवम्बुँजॆन्दु पॆ

न्निद्दवु गण्डुँ देँटि थरणीसुत कौँगिलिपञ्जरम्बुनन्

मुद्दुलुगुल्कु राचिलुक मुक्तिनिधानमुरामराँगदे

तद्दयु नेँडु नाकडकु दाशरथी करुणापयोनिधी.

॥ 41 ॥

श्लोक 43

कलियुग मर्त्यकोटिनिनु गङ्गॊन रानिविधम्बो भक्तव

त्सलतवहिम्पवो चटुल सान्द्रविपद्दश वार्धि ग्रुङ्कुचो

बिलिचिन बल्क विन्तमऱपी नरुलिट्लनरादु गाक नी

तलपुन लेदॆ सीत चॆऱ दाशरथी करुणापयोनिधी.

॥ 42 ॥

श्लोक 44

जनवर मीक थालि विनसैँपक कर्णमुलन्दु घण्टिका

निनद विनोदमुल् सुलुपुनीचुनकुन् वरमिच्चिनावु नि

न्ननयमुनम्मि कॊल्चिन महात्मुनकेमि यॊसङ्गु दोसनं

दननुत माकॊसङ्गुमय दाशरथी करुणापयोनिधी.

॥ 43 ॥

श्लोक 45

पापमु लॊन्दुवेल रणपन्नग भूत भयज्वारादुलन्

दापद नॊन्दुवेल भरताग्रज मिम्मु भजिञ्चुवारिकिन्

ब्रापुग नीवुदम्मु डिरुपक्कियलन् जनि तद्वित्ति सं

तापमु माम्पि कातुरट दाशरथी करुणापयोनिधि.

॥ 44 ॥

श्लोक 46

अगणित जन्मकर्मदुरि ताम्बुधिलो बहुदुःखवीचिकल्

दॆगिपडवीडलेक जगतीधर नीपदभक्ति नावचे

दगिलि तरिम्पगोरिति बदम्पबडि नदु भयम्भु माम्पवे

तगदनि चित्तमं दिडक दाशरथी करुणापयोनिधी.

॥ 45 ॥

श्लोक 47

नेनॊनरिञ्चु पापमुल नेकमुलैननु नादुजिह्वकुं

बानकमय्यॆमीपरम पावननाममुदॊण्टि चिल्करा

माननुगावुमन्न तुदि माटकु सद्गति जॆन्दॆगावुनन्

दानि धरिम्पगोरॆदनु दाशरथी करुणापयोनिधी.

॥ 46 ॥

श्लोक 48

परधनमुल् हरिञ्चि परभामलनण्टि परान्न मब्बिनन्

मुरिपम कानिमीँदनगु मोसमॆऱुङ्गदु मानसम्बु

स्तरमदिकालकिङ्कर गदाहति पाल्पडनीक मम्मु नेदु

तऱिदरिजेर्चि काचॆदवॊ दाशरथी करुणापयोनिधी.

॥ 47 ॥

श्लोक 49

चेसिति घोरकृत्यमुलु चेसिति भागवतापचारमुल्

चेसिति नन्यदैवमुलँ जेरि भजिञ्चिन वारिपॊन्दु नेँ

जेसिन नेरमुल् दलँचि चिक्कुलँबॆट्टकुमय्ययय्य नी

दासुँडनय्य भद्रगिरि दाशरथी करुणापयोनिधी.

॥ 48 ॥

श्लोक 50

परुल धनम्बुँजूचिपर भामलजूचि हरिम्पगोरु म

द्गुरुतरमानसं बनॆडु दॊङ्गनुबट्टिनिरूढदास्य वि

स्फुरितविवेक पाशमुलँ जुट्टि भवच्चरणम्बने मरु

त्तरुवुनगट्टिवेयग दॆ दाशरथी करुणापयोनिधी.

॥ 49 ॥

श्लोक 51

सललित रामनाम जपसार मॆऱुङ्गनु गाशिकापुरी

निलयुडगानुमीचरण नीरजरेणु महाप्रभावमुं

दॆलियनहल्यगानु जगतीवर नीदगु सत्यवाक्यमुं

दलपग रावणासुरुनि तम्मुडगानु भवद्विलासमुल्

दलचिनुतिम्प नातरमॆ दाशरथी करुणापयोनिधी.

॥ 50 ॥

श्लोक 52

पातकुलैन मीकृपकु बात्रुलु कारॆतलञ्चिचूड ज

ट्रातिकिगल्गॆ बावन मरातिकि राज्यसुखम्बुगल्गॆ दु

र्जातिकि बुण्यमब्बॆगपि जातिमहत्त्वमुनॊन्दॆगावुनं

दातव यॆट्टिवारलकु दाशरथी करुणापयोनिधी.

॥ 51 ॥

श्लोक 53

मामक पातक वज्रमु म्राम्पनगण्यमु चित्रगुप्तुले

येमनि व्रातुरो? शमनुडेमि विधिञ्चुनॊ? कालकिङ्कर

स्तोम मॊनर्चिटेमॊ? विनजॊप्पड दिन्तकमुन्नॆदीनचिं

तामणि यॊट्लु गाचॆदवॊ दाशरथी करुणापयोनिधी.

॥ 52 ॥

श्लोक 54

दासिन चुट्टूमा शबरि? दानि दयामति नेलिनावु; नी

दासुनि दासुडा? गुहुडु तावकदास्य मॊसङ्गिनावु ने

जेसिन पापमो! विनुति चेसिनगाववु गावुमय्य! नी

दासुललोन नेनॊकँड दाशरथी करुणापयोनिधी.

॥ 53 ॥

श्लोक 55

दीक्षवहिञ्चि नाकॊलदि दीनुल नॆन्दऱि गाचितो जग

द्रक्षक तॊल्लिया द्रुपद राजतनूज तलञ्चिनन्तने

यक्षयमैन वल्वलिडि तक्कट नामॊऱजित्तगिञ्चि

प्रत्यक्षमु गाववेमिटिकि दाशरथी करुणापयोनिधी.

॥ 54 ॥

श्लोक 56

नीलघनाभमूर्तिवगु निन्नु गनुङ्गॊनिकोरि वेडिनन्

जालमुसेसि डागॆदवु संस्तुति कॆक्किन रामनाम मे

मूलनु दाचुकोगलवु मुक्तिकि ब्रापदि पापमूलकु

द्दालमुगादॆ मायॆडल दाशरथी करुणापयोनिधी.

॥ 55 ॥

श्लोक 57

वलदु पराकु भक्तजनवत्सल नी चरितम्बु वम्मुगा

वलदु पराकु नीबिरुदु वज्रमुवण्टिदि गान कूरके

वलदु पराकु नादुरित वार्धिकि दॆप्पवुगा मनम्बुलो

दलतुमॆका निरन्तरमु दाशरथी करुनापयोनिधी.

॥ 56 ॥

श्लोक 58

तप्पुलॆऱुङ्ग लेक दुरितम्बुलु सेसितिनण्टि नीवुमा

यप्पवुगावु मण्टि निकनन्युलकुन् नुदुरण्टनण्टिनी

कॊप्पिदमैन दासजनु लॊप्पिन बण्टुकु बटवण्टि ना

तप्पुल कॆल्ल नीवॆगति दाशरथी करुणापयोनिधी.

॥ 57 ॥

श्लोक 59

इतडु दुरात्मुडञ्चुजनु लॆन्नँग नाऱडिँगॊण्टिनेनॆपो

पतितुँड नण्टिनो पतित पावनमूर्तिवि नीवुगल्ल ने

नितिरुल वेँडनण्टि निह मिच्चिननिम्मुपरम्बॊसङ्गुमी

यतुलित रामनाम मधु राक्षर पालिनिरन्तरं बहृ

द्गतमनि नम्मिकॊल्चॆदनु दाशरथी करुणापयोनिधी.

॥ 58 ॥

श्लोक 60

अञ्चितमैननीदु करुणामृतसारमु नादुपैनि ब्रो

क्षिञ्चिन जालुदाननिर सिञ्चॆदनादुरितम्बु लॆल्लदू

लिञ्चॆद वैरिवर्ग मॆडलिञ्चॆद गोर्कुलनीदुबण्टनै

दञ्चॆद, गालकिङ्करुल दाशरथी करुणापयोनिधी.

॥ 59 ॥

श्लोक 61

जलनिधु लेडुनॊक्क मॊगिँ जक्किकिदॆच्चॆशरम्बु, ऱातिनिं

पलरँग जेसॆनातिगँब दाब्जपरागमु, नी चरित्रमुं

जलजभवादि निर्जरुलु सन्नुति सेयँग लेरु गावुनं

दलपनगण्यमय्य यिदि दाशरथी करुणापयोनिधी.

॥ 60 ॥

श्लोक 62

कोतिकिशक्यमा यसुरकोटुल गॆल्वनु गाल्चॆबो निजं

बातनिमेन शीतकरुडौट दवानलु डॆट्टिविन्त? मा

सीतपतिव्रता महिमसेवकु भाग्यमुमीकटाक्षमु

धातकु शक्यमा पॊगड दाशरथी करुणापयोनिधी.

॥ 61 ॥

श्लोक 63

भूपललाम रामरघुपुङ्गवराम त्रिलोक राज्य सं

स्धापनराम मोक्षफल दायक राम मदीय पापमुल्

पापगदय्यराम निनु ब्रस्तुति चेसॆदनय्यराम सी

तापतिराम भद्रगिरि दासरथी करुणापयोनिधी.

॥ 62 ॥

श्लोक 64

नीसहजम्बु सात्विकमु नीविडिपट्टु सुधापयोधि, प

द्मासनुडात्मजुण्डु, गमलालयनी प्रियुरालु नीकु सिं

हासनमिद्धरित्रि; गॊडुगाक समक्षुलु चन्द्रबास्करुल्

नीसुमतल्पमादिफणि नीवॆ समस्तमु गॊल्चिनट्टि नी

दासुल भाग्यमॆट्टिदय दाशरथी करुणापयोनिधी.

॥ 63 ॥

श्लोक 65

चरणमु सोकिनट्टि शिलजव्वनिरूपगु टॊक्कविन्त, सु

स्धिरमुग नीटिपै गिरुलु देलिन दॊक्कटि विन्तगानि मी

स्मरण दनर्चुमानवुलु सद्गति जॆन्दिन दॆन्तविन्त? यी

धरनु धरात्मजारमण दाशरथी करुणापयोनिधी.

॥ 64 ॥

श्लोक 66

दैवमु तल्लिदण्ड्रितगु दात गुरुण्डु सखुण्डु निन्नॆ का

भावन सेयुचुन्नतऱि पापमुलॆल्ल मनोविकार दु

र्भावितुजेयुचुन्नविकृपामतिवैननु कावुमी जग

त्पावनमूर्ति भद्रगिरि दाशरथी करुणापयोनिधी.

॥ 65 ॥

श्लोक 67

वासव राज्यभोग सुख वार्धिनि देलु प्रभुत्वमब्बिना

यासकुमेर लेदु कनकाद्रिसमान धनम्बुगूर्चिनं

गासुनु वॆण्टरादु कनि कानक चेसिन पुण्यपापमुल्

वीसरबोव नीवु पदिवेलकु जालु भवम्बुनॊल्ल नी

दासुनिगाग नेलुकॊनु दाशरथी करुणापयोनिधी.

॥ 66 ॥

श्लोक 68

सूरिजनुल् दयापरुलु सूनृतवादु ललुब्धमानवुल्

वेरपतिप्रताङ्गनलु विप्रुलु गोवुलु वेदमुल् महा

भारमुदाल्पगा जनुलु पावनमैन परोपकार स

त्कार मॆऱुङ्गुले रकट दाशरथी करुणापयोनिधी.

॥ 67 ॥

श्लोक 69

वारिचरावतारमु वारिधिलो जॊऱबाऱि क्रोध वि

स्तारगुडैन या निगमतस्करवीर निशाचरेन्द्रुनिं

जेरि वधिञ्चि वेदमुल चिक्कॆडलिञ्चि विरिञ्चिकि महो

दारतनिच्चितीवॆगद दाशरथी करुणापयोनिधी.

॥ 68 ॥

श्लोक 70

करमनुर क्तिमन्दरमु गव्वमुगा नहिराजुद्राडुगा

दॊरकॊन देवदानवुलु दुग्धपयोधिमथिञ्चुचुन्नचो

धरणिचलिम्पलोकमुलु तल्लडमन्दग गूर्ममै धरा

धरमु धरिञ्चितीवॆकद दाशरथी करुणापयोनिधी.

॥ 69 ॥

श्लोक 71

धारुणि जापजुट्टिन विधम्बुनगैकॊनि हेमनेत्रुड

व्वारिधिलोनदागिननु वानिवधिञ्चि वराहमूर्तिवै

धारुणिदॊण्टिकै वडिनि दक्षिणशृङ्गमुन धरिञ्चि वि

स्तार मॊनर्चितीवे कद दाशरथी करुणापयोनिधी.

॥ 70 ॥

श्लोक 72

पॆटपॆटनुक्कु कम्बमुन भीकरदन्त नखान्तर प्रभा

पटलमु गप्प नुप्पतिलि भण्डनवीधि नृसिंहभीकर

स्फुटपटुशक्ति हेमकशिपु विदलिञ्चि सुरारिपट्टि नं

तटगृपजूचितीवॆकद दाशरथी करुणापयोनिधी.

॥ 71 ॥

श्लोक 73

पदयुगलम्बु भूगगन भागमुल वॆसनूनि विक्रमा

स्पदमगुनब्बलीन्द्रुनॊक पादमुनन्दल क्रिन्दनॊत्तिमे

लॊदवजगत्त्रयम्बु बुरु हूतुनिकिय्यवटुण्डवैनचि

त्सदमलमूर्ति वीवॆकद दाशरथी करुणापयोनिधी.

॥ 72 ॥

श्लोक 74

इरुवदियॊक्कमाऱु धरणीशुल नॆल्लवधिञ्चि तत्कले

बर रुधिर प्रवाहमुन बैतृकतर्पण मॊप्पजेसि भू

सुरवरकोटिकि मुदमु सॊप्पड भार्गवराममूर्तिवै

धरणिनॊसङ्गिती वॆकद दाशरथी करुणापयोनिधी.

॥ 73 ॥

श्लोक 75

दुरमुन दाटकन्दुनिमि धूर्जटिविल् दुनुमाडिसीतनुं

बरिणयमन्दि तण्ड्रिपनुप घन काननभूमि केगि दु

स्तरपटुचण्ड काण्डकुलिशाहति रावणकुम्भकर्ण भू

धरमुल गूल्चिती वॆकद दाशरथी करुणापयोनिधी.

॥ 74 ॥

श्लोक 76

अनुपमयादवान्वयसु धाब्धिसुधानिधि कृष्णमूर्तिनी

कनुजुडुगाजनिञ्चि कुजनावलिनॆल्ल नडञ्चि रोहिणी

तनयुडनङ्ग बाहुबल दर्पमुन बलराम मूर्तिवै

तनरिन वेल्पवीवॆकद दाशरथी करुणापयोनिधी.

॥ 75 ॥

श्लोक 77

सुरलुनुतिम्पगा द्रिपुर सुन्दरुल वरियिम्पबुद्धरू

परयग दाल्चितीवु त्रिपुरासुरकोटि दहिञ्चुनप्पुडा

हरुनकुदोडुगा वरश रासन बाणमुखो ग्रसाधनो

त्कर मॊनरिञ्चितीवुकद दाशरथी करुणापयोनिधी.

॥ 76 ॥

श्लोक 78

सङ्करदुर्गमै दुरित सङ्कुलमैन जगम्बुजूचि स

र्वङ्कषलील नु त्तम तुरङ्गमुनॆक्कि करासिबूनि वी

राङ्कविलास मॊप्प गलि काकृत सज्जनकोटिकि निरा

तङ्क मॊनर्चितीवुकद दाशरथी करुणापयोनिधी.

॥ 77 ॥

श्लोक 79

मनमुननूहपोषणलु मर्वकमुन्नॆ कफादिरोगमुल्

दनुवुननण्टि मेनिबिगि दप्पकमुन्नॆनरुण्डु मोक्ष सा

धन मॊनरिम्पँगावलयुँ दत्त्वविचारमु मानियुण्डुट

ल्तनुवुनकु विरोधमिदि दाशरथी करुणापयोनिधी.

॥ 78 ॥

श्लोक 80

मुदमुन काटपट्टुभव मोहमद्व दिरदाङ्कुशम्बु सं

पदल कॊटारु कोरिकल पण्ट परम्बुन कादि वैरुल

न्नदन जयिञ्चुत्रोव विपदब्धिकिनावगदा सदाभव

त्सदमलनामसंस्मरण दाशरथी करुणापयोनिधी.

॥ 79 ॥

श्लोक 81

दुरित लतानुसार भय दुःख कदम्बमु रामनामभी

करतल हेतिचेँ दॆगि वकावकलै चनकुण्ड नेर्चुने

दरिकॊनि मण्डुचुण्डु शिख दार्कॊनिन शलबादिकीटको

त्करमु विलीनमैचनवॆ दाशरथी करुणापयोनिधी.

॥ 80 ॥

श्लोक 82

हरिपदभक्तिनिन्द्रियज यान्वितुडुत्तमुँडिन्द्रिमम्बुलन्

मरुगक निल्पनूदिननु मध्यमुँडिन्द्रियपारश्युडै

परगिनचो निकृष्टुडनि पल्कग दुर्मतिनैन नन्नु ना

दरमुन नॆट्लुकाचॆदवॊ दाशरथी करुणापयोनिधी.

॥ 81 ॥

श्लोक 83

वनकरिचिक्कु मैनसकु पाचविकिं जॆडिपोयॆ मीनुता

विनिकिकिँजिक्कॆँजिल्वगनु वेँदुऱुँ जॆन्दॆनु लेल्लु ताविलो

मनिकिनशिञ्चॆ देटितर मायिरुमूँटिनि गॆल्वनै दुसा

धनमुलनी वॆ कावनगु दाशरथी करुणापयोनिधी.

॥ 82 ॥

श्लोक 84

करमुलुमीकुम्रॊक्कुलिड कन्नुलु मिम्मुनॆ चूड जिह्व मी

स्मरणदनर्पवीनुलुभ वत्कथलन् विनुचुण्डनास मी

यऱुतुनु बॆट्टुपूसरुल कासगॊनं बरमार्थ साधनो

त्करमिदि चेयवेकृपनु दाशरथी करुणापयोनिधी.

॥ 83 ॥

श्लोक 85

चिरतरभक्ति नॊक्कतुलसीदल मर्पण चेयुवाडु खे

चरगरु डोरग प्रमुख सङ्घमुलो वॆलुगन् सधा भवत्

सुरुचिर धीन्द पादमुल बूजलॊनर्चिन वारिकॆल्लद

त्पर मरचेतिधात्रिगद दाशरथी करुणापयोनिधी.

॥ 84 ॥

श्लोक 86

भानुडु तूर्पुनन्दुगनु पुट्टिनँ बावक चन्द्र तेजमुल्

हीनत जॆन्दिनट्लु जगदेक विराजितमैन नी पद

ध्यानमु चेयुचुन्नँ बर दैवमरीचुलडङ्गकुण्डु ने

दानव गर्व निर्दलन दाशरथी करुणापयोनिधी.

॥ 85 ॥

श्लोक 87

नीमहनीयतत्त्व रस निर्ण यबोध कथामृताब्धिलो

दामुनुग्रुङ्कुलाडकवृ थातनुकष्टमुजॆन्दि मानवुं

डी महिलोकतीर्थमुल नॆल्ल मुनिङ्गिन दुर्विकार हृ

तामसपङ्कमुल् विदुनॆ दाशरथी करुणापयोनिधी.

॥ 86 ॥

श्लोक 88

नीमहनीयतत्त्व रस निर्ण यबोध कथामृताब्धिलो

दामुनुग्रुङ्कुलाडकवृ थातनुकष्टमुजॆन्दि मानवुं

डी महिलोकतीर्थमुल नॆल्ल मुनिङ्गिन दुर्विकार हृ

तामसपङ्कमुल् विदुनॆ दाशरथी करुणापयोनिधी.

॥ 87 ॥

श्लोक 89

काञ्चन वस्तुसङ्कलित कल्मष मग्नि पुटम्बु बॆट्टॆवा

रिञ्चिनरीति नात्मनिगिडिञ्चिन दुष्कर दुर्मलत्रयं

बञ्चित भ क्तियोग दह नार्चिँदगुल्पक पायुने कन

त्काञ्चनकुण्डलाभरण दाशरथी करुणापयोनिधी.

॥ 88 ॥

श्लोक 90

नीसति पॆक्कु गल्मुलिडनेर्पिरि, लोक मकल्मषम्बुगा

नीसुत सेयु पावनमु निर्मित कार्यधुरीण दक्षुडै

नीसुतुडिच्चु नायुवुलु निन्न भुजिञ्चिनँ गल्गकुण्डुने

दासुलकीप्सि तार्थमुल दाशरथी करुणापयोनिधी.

॥ 89 ॥

श्लोक 91

वारिजपत्रमन्दिडिन वारिविधम्बुन वर्तनीयमं

दारय रॊम्पिलोन दनु वण्टनि कुम्मरपुर्वुरीति सं

सारमुन मॆलङ्गुचु विचारडैपरमॊन्दुगादॆस

त्कार मॆऱिङ्गि मानवुडु दाशरथी करुणापयोनिधी.

॥ 90 ॥

श्लोक 92

ऎक्कडि तल्लिदण्ड्रि सुतुलॆक्कडि वारु कलत्र बान्धवं

बॆक्कड जीवुँडॆट्टि तनु वॆत्तिन बुट्टुनु बोवुचुन्न वा

डॊक्कडॆपाप पुणय फल मॊन्दिन नॊक्कडॆ कानराडुवे

ऱॊक्कडु वॆण्टनण्टिभव मॊल्लनयाकृप जूडुवय्यनी

टक्करि मायलन्दिडक दाशरथी करुणा पयोनिधी.

॥ 91 ॥

श्लोक 93

दॊरसिनकायमुल्मुदिमि तोचिनँजूचिप्रभुत्वमुल्सिरु

ल्मॆऱपुलुगागजूचिमऱि मेदिनिलोँदमतोडिवारुमुं

दरुगुटजूचिचूचि तॆगु नायुवॆऱुङ्गक मोहपाशमु

लरुगनिवारिकेमिगति दाशरथी करुणापयोनिधी.

॥ 92 ॥

श्लोक 94

सिरिगलनाँडु मैमऱचि चिक्किननाँडुदलञ्चि पुण्यमुल्

पॊरिँबॊरि सेयनैतिननि पॊक्किनँ गल्गु नॆगालिचिच्चुपैँ

गॆरलिन वेलँदप्पिकॊनि कीड्पडु वेल जलम्बु गोरि त

त्तरमुनँ द्रव्विनं गलदॆ दाशरथी करुणापयोनिधी.

॥ 93 ॥

श्लोक 95

जीवनमिङ्कँ बङ्कमुन जिक्किन मीनु चलिम्पकॆन्तयु

दावुननिल्चि जीवनमॆ दद्दयुँ गोरुविधम्बु चॊप्पडं

दावलमैनँगानि गुऱि तप्पनिवाँडु तरिञ्चुवाँडया

तावकभक्तियो गमुन दाशरथी करुणापयोनिधी.

॥ 94 ॥

श्लोक 96

सरसुनिमानसम्बु सर सज्ञुडॆरुङ्गुनु मुष्कराधमुं

डॆऱिँगिग्रहिञ्चुवाडॆ कॊल नेकनिसमुँ गागदुर्दुरं

बरयँग नेर्चुनॆट्लु विक चाब्दमरन्द रसैक सौरभो

त्करमुमिलिन्द मॊन्दुक्रिय दाशरथी करुणापयोनिधी.

॥ 95 ॥

श्लोक 97

नोँचिनतल्लिदण्ड्रिकिँ दनूभवुँडॊक्कडॆचालु मेटिचे

चाँचनिवाडु वेऱॊकँडु चाचिन लेदन किच्चुवाँडुनो

राँचिनिजम्बकानि पलु काडनिवाँडु रणम्बुलोन मेन्

दाचनिवाँडु भद्रगिरि दाशरथी करुणापयोनिधी.

॥ 96 ॥

श्लोक 98

श्रीयुतजानकीरमण चिन्नयरूप रमेशराम ना

रायण पाहिपाहियनि ब्रस्तुतिँ जेसिति नामनम्बुनं

बायक किल्बिषव्रज वि पाटनमन्दँग जेसि सत्कला

दायि फलम्बुनाकियवॆ दाशरथी करुणापयोनिधी.

॥ 97 ॥

श्लोक 99

ऎन्तटिपुण्यमो शबरि यॆङ्गिलिगॊण्टिवि विन्तगादॆ नी

मन्तन मॆट्टिदो युडुत मैनिक राग्र नखाङ्कुरम्बुलन्

सन्तसमन्दँ जेसितिवि सत्कुलजन्ममु लेमि लॆक्क वे

दान्तमुगादॆ नी महिम दाशरथी करुणापयोनिधी.

॥ 98 ॥

श्लोक 100

बॊङ्कनिवाँडॆयोग्युडरि बृन्दमु लॆत्तिन चोटजिव्वकुं

जङ्कनिवाँडॆजोदु रभसम्बुन नर्थि करम्बुसाँचिनं

गॊङ्कनिवाँडॆदात मिमुँ गॊल्चिभजिञ्चिन वाँडॆ पोनिरा

तङ्क मनस्कुँ डॆन्न गनु दाशरथी करुणापयोनिधी.

॥ 99 ॥

श्लोक 101

भ्रमरमुगीटकम्बुँ गॊनि पाल्पडि झाङ्करणो कारियै

भ्रमरमुगानॊनर्चुननि पल्कुटँ जेसि भवादि दुःखसं

तमसमॆडल्चि भक्तिसहि तम्बुग जीवुनि विश्वरूप त

त्त्वमुनधरिञ्चु टेमरुदु दाशरथी करुणापयोनिधी.

॥ 100 ॥

श्लोक 102

तरुवुलु पूचिकायलगु दक्कुसुमम्बुलु पूजगाभव

च्चरणमु सोकिदासुलकु सारमुलो धनधान्यराशुलै

करिभट घोटकाम्बर नकायमुलै विरजा समु

त्तरण मॊनर्चुजित्रमिदि दाशरथी करुणापयोनिधी.

॥ 101 ॥

श्लोक 103

पट्टितिभट्टरार्यगुरु पादमुलिम्मॆयिनूर्ध्व पुण्ड्रमुल्

वॆट्टितिमन्त्रराज मॊडि बॆट्टिति नय्यमकिङ्क रालिकिं

गट्टितिबॊम्ममीचरण कञ्जलन्दुँ दलम्पुपॆट्टि बो

दट्टितिँ बापपुञ्जमुल दाशरथी करुणापयोनिधी.

॥ 102 ॥

श्लोक 104

अल्लन लिङ्गमन्त्रि सुतुडत्रिज गोत्रजुडादिशाख कं

चॆर्ल कुलोद्बवुं दम्ब्रसिद्धिडनै भवदङ्कितम्बुगा

नॆल्लकवुल् नुतिम्प रचियिञ्चिति गोपकवीन्द्रुडन् जग

द्वल्लभ नीकु दासुडनु दाशरथी करुणापयोनिधी.

॥ 103 ॥

श्लोक 105

दाशरथी शतकम् | (Dasarathi Satakam) Lyrics | Vedic Tithi