सिद्धिविनायक मंदिर मुंबई: संपूर्ण दर्शन और यात्रा गाइड

मुंबई के हृदय में एक आध्यात्मिक यात्रा पर निकलें और प्रतिष्ठित सिद्धिविनायक मंदिर में भगवान गणेश की दिव्य उपस्थिति का अनुभव करें। लाखों लोगों की आस्था का प्रतीक यह प्रतिष्ठित मंदिर, अपनी मनोकामनाएं पूर्ण करने और भक्तों को आशीर्वाद प्रदान करने के लिए प्रसिद्ध है। सिद्धिविनायक मंदिर मुंबई की इस विस्तृत गाइड के साथ एक समृद्ध तीर्थयात्रा के लिए तैयार हो जाइए, जिसमें इसके ऐतिहासिक जड़ों से लेकर व्यावहारिक यात्रा सलाह तक सब कुछ शामिल है।
मंदिर का अवलोकन
- स्थान: के.वी. रोड, सिद्धिविनायक, प्रभादेवी, मुंबई, महाराष्ट्र, भारत।
- मुख्य देवता: भगवान गणेश, विशेष रूप से श्री सिद्धिविनायक के रूप में, जो सफलता और पूर्ति के दाता हैं। यह मूर्ति अद्वितीय है, जिसमें सूंड दाईं ओर मुड़ी हुई है।
- मंदिर का प्रकार: भगवान गणेश को समर्पित एक प्रमुख हिंदू मंदिर। यह कोई ज्योतिर्लिंग या शक्तिपीठ नहीं है, लेकिन एक तीर्थ स्थल के रूप में इसका अत्यधिक महत्व है।
- यात्रा का सर्वोत्तम समय: जनवरी, फरवरी, नवंबर और दिसंबर के महीने सुखद मौसम प्रदान करते हैं, जो यात्रा के लिए आदर्श हैं। हालांकि, मंदिर साल भर भक्तों से भरा रहता है, खासकर शुभ दिनों के दौरान।
- महत्व: सिद्धिविनायक मंदिर मुंबई एक शक्तिशाली तीर्थस्थल है जहाँ भक्त मानते हैं कि भगवान गणेश उनकी मनोकामनाएं पूर्ण करते हैं।
ऐतिहासिक पृष्ठभूमि
सिद्धिविनायक मंदिर मुंबई की उत्पत्ति ऐतिहासिक वृत्तांतों और स्थानीय लोककथाओं के मिश्रण में डूबी हुई है, जो इसे एक प्रमुख तीर्थ स्थल के रूप में विकसित होने की तस्वीर पेश करती है। वर्तमान मंदिर संरचना 1801 से है, जिसका निर्माण एक समृद्ध ठेकेदार लक्ष्मण विठू पाटिल ने करवाया था। हालांकि, मंदिर की स्थापना की किंवदंती देउबाई पाटिल नामक एक महिला को श्रेय दी जाती है, जो निःसंतान होने के कारण, यदि उन्हें संतान का आशीर्वाद मिलता तो भगवान गणेश के लिए मंदिर बनाने की मन्नत मानी थी। उनकी इच्छा पूरी हुई, और मंदिर की स्थापना हुई।
सदियों से, सिद्धिविनायक मंदिर मुंबई ने महत्वपूर्ण परिवर्तन और संरक्षण देखा है। शुरू में एक मामूली संरचना, यह स्थानीय समुदाय की अटूट आस्था और भगवान सिद्धिविनायक से जुड़े कथित चमत्कारों के कारण धीरे-धीरे प्रमुखता से बढ़ा। मंदिर ने व्यापक मान्यता प्राप्त की और दूर-दूर से भक्तों को आकर्षित किया, जिससे तीर्थयात्रियों की बढ़ती संख्या को समायोजित करने के लिए विस्तार और नवीनीकरण हुआ।
मंदिर का इतिहास मुंबई के सामाजिक-राजनीतिक परिदृश्य से भी जुड़ा हुआ है। इसने एक औपनिवेशिक बंदरगाह से एक हलचल भरे महानगर तक शहर के विकास का मूक गवाह रहा है। महत्वपूर्ण संरक्षकों और निर्माताओं ने, भक्ति से प्रेरित होकर, इसके रखरखाव और सुशोभन में योगदान दिया है, यह सुनिश्चित करते हुए कि इसकी पवित्रता और भव्यता बनी रहे। पुरातात्विक महत्व प्राचीन खंडहरों में नहीं, बल्कि दो सदियों से अधिक समय तक आस्था के एक जीवित स्मारक और वास्तुशिल्प अनुकूलन के रूप में इसके निरंतर विकास में निहित है।
वास्तुशिल्प विशेषताएँ
सिद्धिविनायक मंदिर मुंबई, पारंपरिक अर्थों में एक प्राचीन स्मारक न होते हुए भी, एक विशिष्ट वास्तुशिल्प शैली का दावा करता है जो इसके आधुनिक निर्माण और भक्तिपूर्ण उद्देश्य को दर्शाता है। मंदिर की वास्तुकला मुख्य रूप से समकालीन प्रभावों के साथ इंडो-इस्लामिक है, जिसे कार्यक्षमता और आध्यात्मिक वातावरण के लिए डिज़ाइन किया गया है।
मंदिर की सबसे आकर्षक विशेषता इसका सुनहरा गुंबद है, जो मुंबई की धूप में चमकता है, जो समृद्धि और दिव्य कृपा का प्रतीक है। मुख्य गर्भगृह में भगवान सिद्धिविनायक की मूर्ति स्थापित है। मूर्ति स्वयं एक उत्कृष्ट कृति है, जिसे एक ही काले पत्थर से तराशा गया है, जिसमें भगवान गणेश की सूंड दाईं ओर मुड़ी हुई है, जो एक दुर्लभ और शुभ विशेषता है। मूर्ति को चांदी के मुकुट और जटिल सोने के गहनों से सजाया गया है, जो इसकी दिव्य आभा को बढ़ाता है।
गर्भगृह के चारों ओर विभिन्न मंडप (हॉल) हैं जो भक्तों के प्रवाह को सुविधाजनक बनाने और प्रार्थना और चिंतन के लिए स्थान प्रदान करने के लिए डिज़ाइन किए गए हैं। मंदिर परिसर सुव्यवस्थित है, जिसमें मुख्य मंदिर तक स्पष्ट रास्ते हैं। हालांकि इसमें दक्षिण भारतीय मंदिरों की तरह ऊंचे गोपुरम या नागर शैली के मंदिरों की विस्तृत नक्काशी नहीं है, इसकी ताकत इसके शांत और सुलभ डिजाइन में निहित है। उपयोग की जाने वाली सामग्री आधुनिक है, जो स्थायित्व और सौंदर्य अपील पर केंद्रित है, जिसमें संगमरमर की फर्श और अच्छी तरह से प्रकाशित आंतरिक भाग एक शांतिपूर्ण वातावरण में योगदान करते हैं। इंजीनियरिंग चमत्कार लाखों भक्तों के लिए एक सुचारू दर्शन अनुभव सुनिश्चित करते हुए, विशाल भीड़ के कुशल प्रबंधन में निहित है।
आध्यात्मिक और पौराणिक महत्व
सिद्धिविनायक मंदिर मुंबई का हिंदू धर्म में गहरा आध्यात्मिक और पौराणिक महत्व है, मुख्य रूप से भगवान गणेश को समर्पित एक तीर्थस्थल के रूप में, जो बाधाओं को दूर करने वाले और शुरुआत के देवता हैं। भगवान गणेश को विघ्नहर्ता (बाधाओं को दूर करने वाले), बुद्धिप्रदाता (बुद्धि के दाता), और सिद्धि विनायक (जो सफलता और पूर्ति प्रदान करते हैं) के रूप में पूजा जाता है। भक्त इस मंदिर में इस प्रबल विश्वास के साथ आते हैं कि उनकी प्रार्थनाएं सुनी जाएंगी और उनकी इच्छाएं दयालु देवता द्वारा पूरी की जाएंगी।
भगवान गणेश के आसपास की पौराणिक कथाएं विशाल और विविध हैं, जिनमें अनगिनत किंवदंतियाँ उनके दिव्य रूप और शक्तियों की व्याख्या करती हैं। सिद्धिविनायक मंदिर मुंबई में मूर्ति की अनूठी मुद्रा, जिसमें सूंड दाईं ओर मुड़ी हुई है, विशेष रूप से शक्तिशाली मानी जाती है, जो सिद्धि (आध्यात्मिक शक्ति और उपलब्धि) की प्राप्ति का प्रतीक है। कहा जाता है कि यह विशिष्ट रूप को प्रसन्न करना अधिक चुनौतीपूर्ण है लेकिन सच्चे भक्त को अपार पुरस्कार प्रदान करता है।
यह मंदिर भगवान सिद्धिविनायक को समर्पित कई दिव्य कहानियों और चमत्कारों का केंद्र बिंदु है। तीर्थयात्री अक्सर व्यक्तिगत खातों को साझा करते हैं कि कैसे मंदिर जाने के बाद उनके जीवन में परिवर्तन आया है, चाहे वह व्यक्तिगत चुनौतियों पर काबू पाना हो, करियर में सफलता प्राप्त करना हो, या शांति और खुशी पाना हो। भगवान गणेश की सर्वशक्तिमत्ता और एक आदिम देवता के रूप में उनकी भूमिका के स्क्रिप्टुरल संदर्भ सिद्धिविनायक मंदिर मुंबई जाने वाले भक्तों की आस्था में गहराई से निहित हैं। यह मंदिर अटूट भक्ति और sincere प्रार्थना के माध्यम से प्राप्त की जा सकने वाली दिव्य कृपा की एक शक्तिशाली याद दिलाता है।
दर्शन समय और प्रक्रिया
सिद्धिविनायक मंदिर मुंबई में भगवान गणेश की दिव्य उपस्थिति का अनुभव करना एक गहरा व्यक्तिगत और आध्यात्मिक उपक्रम है। समय और प्रक्रियाओं को समझने से एक सुचारू और पूर्ण दर्शन सुनिश्चित होगा।
मंदिर का समय (2024 के अंत/2025 की शुरुआत तक, हमेशा स्थानीय रूप से सत्यापित करें)
- सुबह का दर्शन: सुबह 5:00 बजे से रात 10:00 बजे तक (दैनिक)
- शाम का दर्शन: यह सुबह से रात तक निरंतर दर्शन का हिस्सा है।
- विशेष दर्शन: वरिष्ठ नागरिकों, दिव्यांगों और गर्भवती महिलाओं के लिए विशेष कतारें अक्सर उपलब्ध होती हैं। त्वरित पहुंच के लिए एक सशुल्क दर्शन विकल्प हो सकता है, हालांकि यह भिन्न हो सकता है।
- मंदिर बंद: मंदिर दिन-रात खुला रहता है, जिसमें निर्धारित समय पर विशिष्ट अनुष्ठान किए जाते हैं। कोई विशेष बंद दिन नहीं हैं।
दर्शन प्रक्रिया
- प्रवेश प्रक्रिया: भक्त निर्दिष्ट द्वारों से मंदिर परिसर में प्रवेश करते हैं। सभी आगंतुकों की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए सुरक्षा जांच की जाती है।
- कतार प्रणाली: दर्शन का प्राथमिक तरीका कतार प्रणाली के माध्यम से है। विभिन्न श्रेणियों के भक्तों के लिए अलग-अलग कतारें हैं।
- सामान्य कतार: यह सभी भक्तों के लिए मानक कतार है।
- विशेष कतार: वरिष्ठ नागरिकों (65 वर्ष से ऊपर), गर्भवती महिलाओं और विकलांग व्यक्तियों के लिए। आयु या स्थिति का प्रमाण आवश्यक हो सकता है।
- सशुल्क दर्शन (यदि उपलब्ध हो): कुछ मंदिर भक्तों को सामान्य कतार को बायपास करने और त्वरित दर्शन करने की अनुमति देने के लिए एक सशुल्क दर्शन टिकट प्रदान करते हैं। मंदिर काउंटर पर इस सुविधा के बारे में पूछताछ करें।
- दर्शन की अवधि: कतार में लगने वाला समय दिन, समय और त्योहारों के आधार पर काफी भिन्न हो सकता है। व्यस्त समय और त्योहारों के दौरान, यह 2-4 घंटे या उससे भी अधिक हो सकता है। गर्भगृह में वास्तविक दर्शन का समय संक्षिप्त होता है, जिससे देवता की एक झलक मिल पाती है।
- पोशाक संहिता आवश्यकताएँ: सिद्धिविनायक मंदिर मुंबई में एक मामूली पोशाक संहिता सख्ती से लागू की जाती है। भक्तों से पारंपरिक भारतीय परिधान या सभ्य पश्चिमी परिधान पहनने की अपेक्षा की जाती है। रिवीलिंग कपड़े, शॉर्ट्स या स्लीवलेस टॉप से बचें। पुरुषों को आदर्श रूप से पतलून या धोती और शर्ट या कुर्ता पहनना चाहिए। महिलाओं को साड़ी, सलवार कमीज या सभ्य पश्चिमी परिधान पहनना चाहिए।
पूजा और चढ़ावा
भक्त विभिन्न पूजाओं में भाग ले सकते हैं और भगवान सिद्धिविनायक को चढ़ावा चढ़ा सकते हैं। सामान्य चढ़ावों में शामिल हैं:
- मोदक: भगवान गणेश का प्रिय मिष्ठान्न।
- लड्डू: एक और लोकप्रिय चढ़ावा।
- दूर्वा घास: गणेश जी के लिए बहुत शुभ मानी जाती है।
- फूल: विशेष रूप से लाल फूल।
- चंदन का लेप: देवता को लगाया जाता है।
- सिक्के और मुद्रा: कृतज्ञता के प्रतीक के रूप में भक्तों द्वारा चढ़ाए जाते हैं।
प्रसाद: दर्शन के बाद अक्सर मीठे लड्डू प्रसाद के रूप में वितरित किए जाते हैं।
प्रमुख त्यौहार और उत्सव
सिद्धिविनायक मंदिर मुंबई कई प्रमुख त्योहारों के दौरान जीवंत उत्सवों के साथ जीवंत हो उठता है, जिससे भगवान गणेश का आशीर्वाद लेने के इच्छुक भक्तों की भारी भीड़ उमड़ पड़ती है।
गणेश चतुर्थी: यह सिद्धिविनायक मंदिर मुंबई में मनाया जाने वाला सबसे महत्वपूर्ण त्योहार है, जो आम तौर पर अगस्त या सितंबर में पड़ता है। यह त्योहार भगवान गणेश की जयंती के रूप में मनाया जाता है। मंदिर को भव्य रूप से सजाया जाता है, और विशेष पूजा, आरती और सांस्कृतिक कार्यक्रम आयोजित किए जाते हैं। पूरा मुंबई शहर भक्ति से सराबोर रहता है, और मंदिर त्योहार के पूरे दस दिनों के लिए भक्तों की अभूतपूर्व भीड़ देखता है। यह मंदिर के आध्यात्मिक उत्साह का अनुभव करने का एक आदर्श, यद्यपि भीड़भाड़ वाला, समय है।
महा शिवरात्रि: फरवरी या मार्च में मनाया जाने वाला यह त्योहार भगवान शिव को समर्पित है। हालांकि सिद्धिविनायक मंदिर मुख्य रूप से गणेश जी के लिए है, लेकिन भगवान शिव के साथ अक्सर पूजा की जाती है, और विशेष प्रार्थनाएं की जाती हैं। भक्त उपवास रखते हैं और पूजा करते हैं।
गुड़ी पड़वा: मराठी नव वर्ष, मार्च या अप्रैल में मनाया जाता है। यह शुभ अवसर एक नए वित्तीय और कैलेंडर वर्ष की शुरुआत का प्रतीक है, और भक्त समृद्धि और आने वाले वर्ष के लिए आशीर्वाद लेने के लिए सिद्धिविनायक मंदिर मुंबई जाते हैं।
संकष्टी चतुर्थी (मंगलवार को): यह चंद्र पखवाड़े के चौथे दिन (तिथि) को पड़ता है जो मंगलवार को पड़ता है। इसे भगवान गणेश की पूजा के लिए अत्यंत शुभ माना जाता है। भक्त उपवास रखते हैं और चंद्रमा को देखने और भगवान गणेश को प्रार्थना चढ़ाने के बाद अपना उपवास तोड़ते हैं। सामान्य चतुर्थी की तुलना में भीड़ काफी अधिक होती है।
दिवाली: रोशनी का त्योहार, अक्टूबर या नवंबर में मनाया जाता है। हालांकि गणेश चतुर्थी जितना केंद्रीय नहीं है, भक्त इस शुभ अवधि के दौरान समृद्धि और कल्याण के लिए प्रार्थना करने के लिए मंदिर जाते हैं।
यदि आप जीवंत भक्तिपूर्ण माहौल में डूबना चाहते हैं तो ये त्यौहार यात्रा के लिए आदर्श समय हैं, लेकिन भारी भीड़ के लिए तैयार रहें और अपनी यात्रा की योजना उसी के अनुसार बनाएं।
सिद्धिविनायक मंदिर मुंबई कैसे पहुँचें
सिद्धिविनायक मंदिर मुंबई केंद्रीय रूप से स्थित है और विभिन्न प्रकार के परिवहन माध्यमों से आसानी से पहुँचा जा सकता है।
हवाई मार्ग से
- निकटतम हवाई अड्डा: छत्रपति शिवाजी महाराज अंतर्राष्ट्रीय हवाई अड्डा (BOM), मुंबई।
- दूरी: हवाई अड्डे से मंदिर तक लगभग 10-12 किमी।
- परिवहन विकल्प:
- प्रीपेड टैक्सी/राइड-शेयरिंग ऐप: हवाई अड्डे के टर्मिनलों के बाहर उपलब्ध हैं। यह सबसे सुविधाजनक विकल्प है।
- हवाई अड्डा बसें: BEST (बृहन्मुंबई इलेक्ट्रिक सप्लाई एंड ट्रांसपोर्ट) बसें हवाई अड्डे से शहर के विभिन्न हिस्सों, प्रभादेवी के आसपास के क्षेत्रों सहित, संचालित होती हैं।
ट्रेन से
- निकटतम रेलवे स्टेशन: दादर रेलवे स्टेशन (पूर्व और पश्चिम)।
- ट्रेनें: मुंबई एक प्रमुख रेलवे हब है, और पूरे भारत से ट्रेनें दादर सहित विभिन्न स्टेशनों पर आती हैं।
- दूरी: दादर रेलवे स्टेशन से मंदिर लगभग 2-3 किमी दूर है।
- दादर स्टेशन से परिवहन विकल्प:
- ऑटो-रिक्शा: स्टेशन के बाहर आसानी से उपलब्ध हैं।
- BEST बसें: दादर स्टेशन से प्रभादेवी की ओर कई बस मार्ग चलते हैं।
- पैदल चलना: जो लोग छोटी सैर का आनंद लेते हैं, उनके लिए यह 20-30 मिनट की सुखद सैर है।
सड़क मार्ग से
- सड़क संपर्क: मुंबई राष्ट्रीय और राज्य राजमार्गों से अच्छी तरह जुड़ा हुआ है।
- बस सेवाएं: कई राज्य परिवहन बसें (जैसे, MSRTC) और निजी बस ऑपरेटर मुंबई को भारत भर के प्रमुख शहरों से जोड़ते हैं।
- ड्राइविंग निर्देश: यदि ड्राइव कर रहे हैं, तो जीपीएस नेविगेशन का उपयोग करें। मंदिर के.वी. रोड, प्रभादेवी पर स्थित है, जो एक प्रसिद्ध लैंडमार्क है। व्यस्त समय के दौरान आसपास पार्किंग चुनौतीपूर्ण हो सकती है।
स्थानीय परिवहन
- ऑटो-रिक्शा: मुंबई में स्थानीय परिवहन का सबसे आम साधन। वे मीटर वाले होते हैं और आसानी से उपलब्ध होते हैं।
- BEST बसें: बसों का एक व्यापक नेटवर्क पूरे शहर को कवर करता है, जो यात्रा का एक किफायती तरीका प्रदान करता है। प्रभादेवी के लिए मार्ग अक्सर चलते हैं।
- स्थानीय ट्रेनें: हालांकि सीधे मंदिर तक नहीं, स्थानीय ट्रेनें मुंबई की जीवन रेखा हैं और दादर स्टेशन तक पहुँचने के लिए उपयोग की जा सकती हैं, जहाँ से आप ऑटो-रिक्शा या बस ले सकते हैं।
- टैक्सी/राइड-शेयरिंग ऐप: ओला और उबर व्यापक रूप से उपलब्ध हैं और सुविधाजनक डोर-टू-डोर सेवा प्रदान करते हैं।
आगंतुक जानकारी
सिद्धिविनायक मंदिर मुंबई की आरामदायक और सम्मानजनक यात्रा सुनिश्चित करने के लिए, यहाँ कुछ आवश्यक आगंतुक जानकारी दी गई है:
प्रवेश शुल्क
- सामान्य दर्शन: सामान्य दर्शन के लिए मंदिर में प्रवेश निःशुल्क है।
- विशेष दर्शन: कतारों को बायपास करने के लिए पारंपरिक अर्थों में कोई औपचारिक "विशेष दर्शन" टिकट प्रणाली नहीं है, कुछ मंदिर त्वरित पहुंच के लिए सशुल्क विकल्प प्रदान कर सकते हैं। ऐसी किसी भी सुविधा के लिए मंदिर काउंटर पर पूछताछ करना उचित है।
- दान: दान स्वीकार किए जाते हैं और मंदिर के रखरखाव और धर्मार्थ गतिविधियों के लिए महत्वपूर्ण हैं।
आवास
मुंबई हर बजट और पसंद के अनुरूप आवास विकल्पों की एक विस्तृत श्रृंखला प्रदान करता है।
- मंदिर द्वारा संचालित आवास: कुछ मंदिरों में तीर्थयात्रियों के लिए बुनियादी गेस्ट हाउस या धर्मशालाएं हो सकती हैं। मंदिर प्रशासन कार्यालय में पूछताछ करें।
- बजट होटल: दादर, माटुंगा और परेल जैसे क्षेत्रों में कई बजट-अनुकूल होटल उपलब्ध हैं, जो मंदिर के करीब हैं।
- मध्यम-श्रेणी के होटल: आपको बांद्रा, अंधेरी और दक्षिण मुंबई जैसे क्षेत्रों में मध्यम-श्रेणी के होटलों का एक अच्छा चयन मिलेगा।
- लक्जरी होटल: अधिक आरामदायक प्रवास के लिए, मुंबई पूरे शहर में कई पांच सितारा होटलों का दावा करता है।
उपलब्ध सुविधाएँ
सिद्धिविनायक मंदिर ट्रस्ट तीर्थयात्रियों के लिए आवश्यक सुविधाएं प्रदान करने का प्रयास करता है:
- क्लोक रूम/लॉकर: भक्तों के लिए अपने सामान, जिसमें मोबाइल फोन, कैमरे और चमड़े की वस्तुएं शामिल हैं, को गर्भगृह में प्रवेश करने से पहले संग्रहीत करने के लिए उपलब्ध है।
- पेयजल: मंदिर परिसर के भीतर शुद्ध पेयजल की सुविधाएं आमतौर पर उपलब्ध होती हैं।
- शौचालय: आगंतुकों की सुविधा के लिए स्वच्छ सार्वजनिक शौचालय बनाए रखे जाते हैं।
- भोजन/प्रसाद काउंटर: प्रसाद (अक्सर लड्डू) वितरित किया जाता है। स्नैक्स और पेय बेचने वाले काउंटर भी हो सकते हैं।
- चिकित्सा सुविधाएं: बुनियादी प्राथमिक उपचार सुविधाएं उपलब्ध हो सकती हैं। आपात स्थिति में, मंदिर कर्मचारियों से सहायता लें।
- व्हीलचेयर पहुंच: विशेष रूप से विशेष दर्शन कतारों के लिए, विकलांग व्यक्तियों के लिए पहुंच प्रदान करने के प्रयास किए जाते हैं।
महत्वपूर्ण नियम
मंदिर की पवित्रता और व्यवस्था बनाए रखने के लिए:
- पोशाक संहिता: एक मामूली पोशाक संहिता का सख्ती से पालन करें। रिवीलिंग या अनुचित पोशाक से बचें।
- फोटोग्राफी प्रतिबंध: मुख्य मंदिर परिसर और गर्भगृह के अंदर फोटोग्राफी और वीडियोग्राफी आम तौर पर निषिद्ध है। निर्दिष्ट क्षेत्र फोटोग्राफी की अनुमति दे सकते हैं।
- अनुमत नहीं वस्तुएं: मोबाइल फोन, कैमरे, चमड़े की वस्तुएं (पर्स, बेल्ट, बैग) और नुकीली वस्तुएं आमतौर पर गर्भगृह के अंदर अनुमत नहीं होती हैं और उन्हें क्लोक रूम में जमा करना होता है।
- कतार अनुशासन: कतारों में अनुशासन और व्यवस्था बनाए रखें। धक्का-मुक्की न करें।
- विशेष प्रावधान: वरिष्ठ नागरिकों, गर्भवती महिलाओं और विकलांगों के लिए किए गए विशेष प्रावधानों का सम्मान करें।
- शांति: मंदिर परिसर के भीतर मौन बनाए रखें और तेज बातचीत से बचें।
- धूम्रपान/शराब नहीं: मंदिर परिसर के भीतर धूम्रपान और शराब का सेवन सख्त वर्जित है।
