Narayana Stotram
Narayana Stotram
नारायण स्तोत्रम्
श्लोक 1
नारायण नारायण जय गोविन्द हरे ॥
नारायण नारायण जय गोपाल हरे ॥
करुणापारावार वरुणालयगम्भीर नारायण
श्लोक 2
घननीरदसङ्काश कृतकलिकल्मषनाशन नारायण
॥ 1 ॥
श्लोक 3
नारायण नारायण जय गोविन्द हरे...
यमुनातीरविहार धृतकौस्तुभमणिहार नारायण
॥ 2 ॥
श्लोक 4
पीताम्बरपरिधान सुरकल्याणनिधान नारायण
॥ 3 ॥
श्लोक 5
नारायण नारायण जय गोविन्द हरे...
मञ्जुलगुञ्जाभूष मायामानुषवेष नारायण
॥ 4 ॥
श्लोक 6
राधाधरमधुरसिक रजनीकरकुलतिलक नारायण
॥ 5 ॥
श्लोक 7
नारायण नारायण जय गोविन्द हरे...
मुरलीगानविनोद वेदस्तुतभूपाद नारायण
॥ 6 ॥
श्लोक 8
वारिजभूषाभरण राजीवरुक्मिणीरमण नारायण
॥ 7 ॥
श्लोक 9
नारायण नारायण जय गोविन्द हरे...
जलरुहदलनिभनेत्र जगदारम्भकसूत्र नारायण
॥ 8 ॥
श्लोक 10
पातकरजनीसंहार करुणालय मामुद्धर नारायण
॥ 9॥
श्लोक 11
नारायण नारायण जय गोविन्द हरे...
अघ बकहयकंसारे केशव कृष्ण मुरारे नारायण
॥ 10 ॥
श्लोक 12
हाटकनिभपीताम्बर अभयं कुरु मे मावर नारायण
॥ 11 ॥
श्लोक 13
नारायण नारायण जय गोविन्द हरे...
दशरथराजकुमार दानवमदसंहार नारायण
॥ 12 ॥
श्लोक 14
गोवर्धनगिरि रमण गोपीमानसहरण नारायण
॥ 14 ॥
श्लोक 15
नारायण नारायण जय गोविन्द हरे...
सरयुतीरविहार सज्जनऋषिमन्दार नारायण
॥ 15 ॥
श्लोक 16
विश्वामित्रमखत्र विविधवरानुचरित्र नारायण
॥ 16 ॥
श्लोक 17
नारायण नारायण जय गोविन्द हरे...
ध्वजवज्राङ्कुशपाद धरणीसुतसहमोद नारायण
॥ 17 ॥
श्लोक 18
जनकसुताप्रतिपाल जय जय संस्मृतिलील नारायण
॥ 18 ॥
श्लोक 19
नारायण नारायण जय गोविन्द हरे...
दशरथवाग्धृतिभार दण्डक वनसञ्चार नारायण
॥ 19 ॥
श्लोक 20
मुष्टिकचाणूरसंहार मुनिमानसविहार नारायण
॥ 20 ॥
श्लोक 21
नारायण नारायण जय गोविन्द हरे...
वालिविनिग्रहशौर्य वरसुग्रीवहितार्य नारायण
॥ 21 ॥
श्लोक 22
मां मुरलीकर धीवर पालय पालय श्रीधर नारायण
॥ 22 ॥
श्लोक 23
नारायण नारायण जय गोविन्द हरे...
जलनिधि बन्धन धीर रावणकण्ठविदार नारायण
॥ 23 ॥
श्लोक 24
ताटकमर्दन राम नटगुणविविध सुराम नारायण
॥ 24 ॥
श्लोक 25
नारायण नारायण जय गोविन्द हरे...
गौतमपत्नीपूजन करुणाघनावलोकन नारायण
॥ 25 ॥
श्लोक 26
सम्भ्रमसीताहार साकेतपुरविहार नारायण
॥ 26 ॥
श्लोक 27
नारायण नारायण जय गोविन्द हरे...
अचलोद्धृतचञ्चत्कर भक्तानुग्रहतत्पर नारायण
॥ 27 ॥
श्लोक 28
नैगमगानविनोद रक्षित सुप्रह्लाद नारायण
॥ 28 ॥
श्लोक 29
नारायण नारायण जय गोविन्द हरे नारायण ॥
नारायण नारायण जय गोपाल हरे नारायण नारायण नारायण ॥
इति श्रिमच्छङ्कराचार्य विरचितं नारायण स्तोत्रं सम्पूर्णम् ॥
