Stotram - Sacred Scripture

Ashta Lakshmi Stotram

Ashta Lakshmi Stotram

Stotram
Lakshmi
8 Verses
110%

अष्ट लक्ष्मी स्तोत्रम्

श्लोक 1

आदिलक्ष्मि

सुमनस वन्दित सुन्दरि माधवि, चन्द्र सहॊदरि हेममये

मुनिगण वन्दित मोक्षप्रदायनि, मञ्जुल भाषिणि वेदनुते ।

पङ्कजवासिनि देव सुपूजित, सद्गुण वर्षिणि शान्तियुते

जय जयहे मधुसूदन कामिनि, आदिलक्ष्मि परिपालय माम्

श्लोक 2

धान्यलक्ष्मि

अयिकलि कल्मष नाशिनि कामिनि, वैदिक रूपिणि वेदमये

क्षीर समुद्भव मङ्गल रूपिणि, मन्त्रनिवासिनि मन्त्रनुते ।

मङ्गलदायिनि अम्बुजवासिनि, देवगणाश्रित पादयुते

जय जयहे मधुसूदन कामिनि, धान्यलक्ष्मि सदापालय माम् [परिपालय माम्]

॥ 1 ॥

श्लोक 3

धैर्यलक्ष्मि

जयवरवर्षिणि वैष्णवि भार्गवि, मन्त्र स्वरूपिणि मन्त्रमये [जयवरवर्णिनि]

सुरगण पूजित शीघ्र फलप्रद, ज्ञान विकासिनि शास्त्रनुते ।

भवभयहारिणि पापविमोचनि, साधु जनाश्रित पादयुते

जय जयहे मधु सूधन कामिनि, धैर्यलक्ष्मी परिपालय माम्

॥ 2 ॥

श्लोक 4

गजलक्ष्मि

जय जय दुर्गति नाशिनि कामिनि, सर्वफलप्रद शास्त्रमये

रधगज तुरगपदाति समावृत, परिजन मण्डित लोकनुते ।

हरिहर ब्रह्म सुपूजित सेवित, ताप निवारिणि पादयुते

जय जयहे मधुसूदन कामिनि, गजलक्ष्मी रूपेण पालय माम्

॥ 3 ॥

श्लोक 5

सन्तानलक्ष्मि

अयिखग वाहिनि मोहिनि चक्रिणि, रागविवर्धिनि ज्ञानमये

गुणगणवारधि लोकहितैषिणि, स्वरसप्त भूषित गाननुते । [सप्तस्वर]

सकल सुरासुर देव मुनीश्वर, मानव वन्दित पादयुते

जय जयहे मधुसूदन कामिनि, सन्तानलक्ष्मी त्वं पालय माम् [परिपालय माम्]

॥ 4 ॥

श्लोक 6

विजयलक्ष्मि

जय कमलासिनि सद्गति दायिनि, ज्ञानविकासिनि गानमये

अनुदिन मर्चित कुङ्कुम धूसर, भूषित वासित वाद्यनुते ।

कनकधरास्तुति वैभव वन्दित, शङ्करदेशिक मान्यपदे

जय जयहे मधुसूदन कामिनि, विजयलक्ष्मी सदा पालय माम् [परिपालय माम्]

॥ 5 ॥

श्लोक 7

विद्यालक्ष्मि

प्रणत सुरेश्वरि भारति भार्गवि, शोकविनाशिनि रत्नमये

मणिमय भूषित कर्णविभूषण, शान्ति समावृत हास्यमुखे ।

नवनिधि दायिनि कलिमलहारिणि, कामित फलप्रद हस्तयुते

जय जयहे मधुसूदन कामिनि, विद्यालक्ष्मी सदा पालय माम्

॥ 6 ॥

श्लोक 8

धनलक्ष्मि

धिमिधिमि धिन्धिमि धिन्धिमि-दिन्धिमि, दुन्धुभि नाद सुपूर्णमये

घुमघुम घुङ्घुम घुङ्घुम घुङ्घुम, शङ्ख निनाद सुवाद्यनुते ।

वेद पूराणेतिहास सुपूजित, वैदिक मार्ग प्रदर्शयुते

जय जयहे मधुसूदन कामिनि, धनलक्ष्मि रूपेणा पालय माम्

॥ 7 ॥

श्लोक 9

फलशृति

श्लो॥ अष्टलक्ष्मी नमस्तुभ्यं वरदे कामरूपिणि ।

विष्णुवक्षः स्थला रूढे भक्त मोक्ष प्रदायिनि ॥

श्लो॥ शङ्ख चक्रगदाहस्ते विश्वरूपिणिते जयः ।

जगन्मात्रे च मोहिन्यै मङ्गलं शुभ मङ्गलम् ॥

अष्ट लक्ष्मी स्तोत्रम् | (Ashta Lakshmi Stotram) Lyrics | Vedic Tithi