Stotram - Sacred Scripture

Shiva Tandava Stotram

Shiva Tandava Stotram

Stotram
Shiva
15 Verses
110%

शिव ताण्डव स्तोत्रम्

श्लोक 1

जटाटवीगलज्जलप्रवाहपावितस्थले

गलेवलम्ब्य लम्बितां भुजङ्गतुङ्गमालिकाम् ।

डमड्डमड्डमड्डमन्निनादवड्डमर्वयं

चकार चण्डताण्डवं तनोतु नः शिवः शिवम्

श्लोक 2

जटाकटाहसम्भ्रमभ्रमन्निलिम्पनिर्झरी-

-विलोलवीचिवल्लरीविराजमानमूर्धनि ।

धगद्धगद्धगज्ज्वलल्ललाटपट्टपावके

किशोरचन्द्रशेखरे रतिः प्रतिक्षणं मम

॥ 1 ॥

श्लोक 3

धराधरेन्द्रनन्दिनीविलासबन्धुबन्धुर

स्फुरद्दिगन्तसन्ततिप्रमोदमानमानसे ।

कृपाकटाक्षधोरणीनिरुद्धदुर्धरापदि

क्वचिद्दिगम्बरे मनो विनोदमेतु वस्तुनि

॥ 2 ॥

श्लोक 4

जटाभुजङ्गपिङ्गलस्फुरत्फणामणिप्रभा

कदम्बकुङ्कुमद्रवप्रलिप्तदिग्वधूमुखे ।

मदान्धसिन्धुरस्फुरत्त्वगुत्तरीयमेदुरे

मनो विनोदमद्भुतं बिभर्तु भूतभर्तरि

॥ 3 ॥

श्लोक 5

सहस्रलोचनप्रभृत्यशेषलेखशेखर

प्रसूनधूलिधोरणी विधूसराङ्घ्रिपीठभूः ।

भुजङ्गराजमालया निबद्धजाटजूटक

श्रियै चिराय जायतां चकोरबन्धुशेखरः

॥ 4 ॥

श्लोक 6

ललाटचत्वरज्वलद्धनञ्जयस्फुलिङ्गभा-

-निपीतपञ्चसायकं नमन्निलिम्पनायकम् ।

सुधामयूखलेखया विराजमानशेखरं

महाकपालिसम्पदेशिरोजटालमस्तु नः

॥ 5 ॥

श्लोक 7

करालफालपट्टिकाधगद्धगद्धगज्ज्वल-

द्धनञ्जयाधरीकृतप्रचण्डपञ्चसायके ।

धराधरेन्द्रनन्दिनीकुचाग्रचित्रपत्रक-

-प्रकल्पनैकशिल्पिनि त्रिलोचने मतिर्मम

॥ 6 ॥

श्लोक 8

नवीनमेघमण्डली निरुद्धदुर्धरस्फुरत्-

कुहूनिशीथिनीतमः प्रबन्धबन्धुकन्धरः ।

निलिम्पनिर्झरीधरस्तनोतु कृत्तिसिन्धुरः

कलानिधानबन्धुरः श्रियं जगद्धुरन्धरः

॥ 7 ॥

श्लोक 9

प्रफुल्लनीलपङ्कजप्रपञ्चकालिमप्रभा-

-विलम्बिकण्ठकन्दलीरुचिप्रबद्धकन्धरम् ।

स्मरच्छिदं पुरच्छिदं भवच्छिदं मखच्छिदं

गजच्छिदान्धकच्छिदं तमन्तकच्छिदं भजे

॥ 8 ॥

श्लोक 10

अगर्वसर्वमङ्गलाकलाकदम्बमञ्जरी

रसप्रवाहमाधुरी विजृम्भणामधुव्रतम् ।

स्मरान्तकं पुरान्तकं भवान्तकं मखान्तकं

गजान्तकान्धकान्तकं तमन्तकान्तकं भजे

॥ 9 ॥

श्लोक 11

जयत्वदभ्रविभ्रमभ्रमद्भुजङ्गमश्वस-

-द्विनिर्गमत्क्रमस्फुरत्करालफालहव्यवाट् ।

धिमिद्धिमिद्धिमिध्वनन्मृदङ्गतुङ्गमङ्गल

ध्वनिक्रमप्रवर्तित प्रचण्डताण्डवः शिवः

॥ 10 ॥

श्लोक 12

दृषद्विचित्रतल्पयोर्भुजङ्गमौक्तिकस्रजोर्-

-गरिष्ठरत्नलोष्ठयोः सुहृद्विपक्षपक्षयोः ।

तृष्णारविन्दचक्षुषोः प्रजामहीमहेन्द्रयोः

समं प्रवर्तयन्मनः कदा सदाशिवं भजे

॥ 11 ॥

श्लोक 13

कदा निलिम्पनिर्झरीनिकुञ्जकोटरे वसन्

विमुक्तदुर्मतिः सदा शिरःस्थमञ्जलिं वहन् ।

विमुक्तलोललोचनो ललाटफाललग्नकः

शिवेति मन्त्रमुच्चरन् सदा सुखी भवाम्यहम्

॥ 12 ॥

श्लोक 14

इमं हि नित्यमेवमुक्तमुत्तमोत्तमं स्तवं

पठन्स्मरन्ब्रुवन्नरो विशुद्धिमेतिसन्ततम् ।

हरे गुरौ सुभक्तिमाशु याति नान्यथा गतिं

विमोहनं हि देहिनां सुशङ्करस्य चिन्तनम्

॥ 13 ॥

श्लोक 15

पूजावसानसमये दशवक्त्रगीतं यः

शम्भुपूजनपरं पठति प्रदोषे ।

तस्य स्थिरां रथगजेन्द्रतुरङ्गयुक्तां

लक्ष्मीं सदैव सुमुखिं प्रददाति शम्भुः

॥ 14 ॥

श्लोक 16

शिव ताण्डव स्तोत्रम् | (Shiva Tandava Stotram) Lyrics | Vedic Tithi